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बलरामपुर : एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं कराया तो खाद-बीज से लेकर धान खरीद तक में आ सकती है परेशानी

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बलरामपुर : एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं कराया तो खाद-बीज से लेकर धान खरीद तक में आ सकती है परेशानी


समय रहते किसान कराएं पंजीयन, गांव-गांव पहुंच रही राजस्व और कृषि विभाग की टीम

बलरामपुर, 07 अगस्त (हि.स.)।बलरामपुर जिले में किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ने के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन अभियान तेज कर दिया गया है। समय पर पंजीयन नहीं कराने वाले किसानों को भविष्य में खाद-बीज प्राप्त करने, धान खरीद, डिजिटल क्रॉप सर्वे सहित विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। इसे देखते हुए आज शुक्रवार को राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव पहुंचकर किसानों का पंजीयन करा रही हैं। किसानों की सुविधा के लिए सेवा सहकारी समितियों, कॉमन सर्विस सेंटर और उचित मूल्य दुकानों में भी पंजीयन की व्यवस्था की गई है।

एग्रीस्टेक के माध्यम से प्रत्येक किसान की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान तैयार की जा रही है। किसान आईडी बनने के बाद धान खरीदी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, उर्वरक अनुदान, प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि मशीनीकरण योजना और मुख्यमंत्री किसान सहायता योजना सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करना आसान होगा। इससे किसानों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता भी कम होगी।

प्रशासन के अनुसार कृषि सेवाएं तेजी से डिजिटल प्रणाली से जुड़ रही हैं। ऐसे में एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं कराने वाले किसानों को आगामी समय में खाद-बीज प्राप्त करने, धान विक्रय और अन्य कृषि सुविधाओं में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से आगामी 17 अगस्त से शुरू होने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए किसान पंजीयन महत्वपूर्ण है। पंजीयन नहीं होने की स्थिति में किसान डिजिटल क्रॉप सर्वे से वंचित हो सकते हैं, जिसका असर भविष्य में धान विक्रय पर भी पड़ सकता है।

किसान नजदीकी लोक सेवा केंद्र, ग्राम पंचायत, संबंधित पटवारी, तहसील कार्यालय, सेवा सहकारी समिति अथवा कृषि विभाग के शिविर में जाकर एग्रीस्टेक पंजीयन करा सकते हैं। उचित मूल्य दुकानों में भी पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान स्वयं भी छत्तीसगढ़ के एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं।

पंजीयन के लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, भू-अधिकार पत्र, ऋण पुस्तिका, बी-1 एवं खसरा, बैंक पासबुक तथा आवश्यकतानुसार अन्य दस्तावेज साथ रखना होगा। नए किसानों को पहले एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन कराने के बाद संबंधित समिति में अपनी भूमि का खसरा मैपिंग कराना होगा। दस्तावेजों और विवरणों के सत्यापन के बाद किसान की एग्रीस्टेक आईडी जारी की जाएगी।

संयुक्त खाताधारकों के लिए अलग-अलग पंजीयन जरूरी

यदि किसी ऋण पुस्तिका या भूमि खाते में दो या अधिक व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं, तो प्रत्येक खाताधारक का अलग-अलग एग्रीस्टेक पंजीयन कराना अनिवार्य है। इसी तरह एक खाते में अलग-अलग किसानों के नाम से अलग-अलग खसरा नंबर दर्ज होने पर संबंधित किसानों को अपने-अपने खसरा नंबर का पंजीयन कराना होगा।

पहले से पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन की जरूरत नहीं

जिन किसानों का वर्ष 2025-26 में एग्रीस्टेक पंजीयन हो चुका है और एग्रीस्टेक आईडी जारी हो गई है, उन्हें दोबारा नया पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं है। भूमि, खसरा, रकबा, बैंक खाता, नॉमिनी या अन्य विवरण में परिवर्तन होने पर केवल आवश्यक संशोधन और खसरा मैपिंग करानी होगी। यदि किसान ने इस वर्ष नई भूमि खरीदी है तो केवल नई भूमि का खसरा मैपिंग कराना होगा।

बकेट क्लेम भी जरूरी

एक से अधिक खसरा या खाते वाले किसानों को बकेट के रूप में चिन्हांकित किया गया है। ऐसे किसानों के लिए एग्रीस्टेक में बकेट क्लेम कराना जरूरी है। बकेट क्लेम सही तरीके से नहीं होने पर धान विक्रय के समय परेशानी हो सकती है।

गांव-गांव पहुंच रही टीमें

प्रशासन द्वारा पंचायत स्तर पर विशेष व्यवस्था की गई है। राजस्व अधिकारी और मैदानी अमले की टीमें डोर-टू-डोर संपर्क कर अपंजीकृत किसानों को पंजीयन की जानकारी दे रही हैं। शिविरों से पहले मुनादी कर ग्रामीणों को भी सूचना दी जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए स्थानीय सीएससी सेंटर, सेवा सहकारी समिति, पटवारी कार्यालय और उचित मूल्य दुकानों में पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और भूमि संबंधी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने निकटतम पंजीयन केंद्र पर पहुंचकर जल्द से जल्द एग्रीस्टेक पंजीयन कराएं, ताकि भविष्य में खाद-बीज, धान खरीद, डिजिटल क्रॉप सर्वे और विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय