शेयर बाजार की गिरावट से म्यूचुअस फंड्स ने उठाया फायदा, मार्च में 1.13 लाख करोड़ की खरीदारी
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में मची उथल-पुथल से इंडियन मार्केट में ऐक्टिव म्यूचुअल फंड्स ने जमकर फ्रेश इनवेस्टमेंट कर अपना कैपिटल बेस मजबूत किया। जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण मार्च के महीने में घरेलू शेयर बाजार में आई गिरावट जहां आम निवेशकों को लगातार हैरान परेशान करती रही, वहीं इस गिरावट का देश के तमाम म्युचुअल फंड हाउस ने जमकर फायदा उठाया। मार्च में म्युचुअल फंड हाउस एक्टिव होकर खरीदारी करते रहे। इस महीने म्युचुअल फंड्स ने लगभग 1.13 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की।
मार्च के महीने में जोरदार खरीदारी के बावजूद म्युचुअल फंड्स की टोटल ऐसेट वैल्यू (कुल संपत्ति) घटकर 46.60 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर आ गई, जबकि फरवरी के महीने में म्युचुअल फंड्स की टोटल ऐसेट वैल्यू 51.29 लाख करोड़ रुपये थी। दूसरी ओर, मार्च में स्टॉक मार्केट के टोटल मार्केट कैपीटलाइजेशन में म्युचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 11.10 प्रतिशत से बढ़ कर 11.30 प्रतिशत हो गई।
इस खरीदारी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी फाइनेंशियल कंपनियों के स्टॉक्स की रही। म्युचुअल फंड्स ने फाइनेंशियल कंपनियों के शेयरों में मार्च के महीने के दौरान 55,414 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस तरह मार्च के महीने में म्यूचुअल फंड्स ने अपने कुल निवेश का लगभग 49 प्रतिशत निवेश सिर्फ फाइनेंशियल कंपनियों के स्टॉक्स की खरीदारी में किया।
मार्च के महीने में स्टॉक मार्केट में आई गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयर ही हुए हैं। विदेशी निवेशकों ने इस महीने बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों की जमकर बिकवाली की। मार्च में बैंक निफ्टी करीब 17 प्रतिशत फिसल गया, जबकि निफ्टी का फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 15.6 प्रतिशत लुढ़क गया।
मार्च 2020 के बाद पहली बार इन दोनों सूचकाकों में एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। गिरावट के इस माहौल में इंडियन मार्केट में एक्टिव म्यूचुअल फंड्स ने इन शेयरों की जम कर खरीदारी कर अपने कैपिटल बेस को तो मजबूत किया ही, घरेलू शेयर बाजार को बड़ी गिरावट का शिकार होने से भी कुछ हद तक बचा लिया।
मार्च के महीने में भारतीय म्यूचुअल फंड्स ने फाइनेंशियल के अलावा कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स में भी जम कर निवेश किया। इन शेयरों में उनकी कुल खरीदारी 16,366 करोड़ रुपये की रही। टेलीकॉम स्टॉक्स में उन्होंने 14,656 करोड़ और आईटी शेयरों में 5,717 करोड़ रुपये का निवेश किया। इन सेक्टर्स के अलावा म्यूचुअल फंड्स ने कमोडिटीज सेक्टर में 4,883 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि हेल्थकेयर सेक्टर में 4,178 करोड़ रुपये की और इंडस्ट्रियल सेक्टर में 4,139 करोड़ रुपये की खरीदारी की। वहीं, एफएमसीजी स्टॉक्स में म्यूचुअल फंड्स ने 3,795 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि सर्विस सेक्टर में म्यूचुअल फंड्स की ओर से 3,548 करोड़ रुपये का निवेश आया।
दूसरी ओर मार्च के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बड़े पैमाने पर बिकवाली करते नजर आए। उन्होंने मार्च के महीने में सेकेंडरी मार्केट में लगभग 1.26 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेच दिए। इसमें अकेले फाइनेंशियल सेक्टर से लगभग 60,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए। इसके बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर के 12,500 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए। कंस्ट्रक्शन और मेटल सेक्टर में एफआईआई की तरफ से 9,154 करोड़ रुपये और 3,165 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
इसी तरह एफएमसीजी सेक्टर में एफआईआई ने 5,419 करोड़ रुपये की और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में 2,141 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। वहीं, रियल्टी सेक्टर में 4,693 करोड़ रुपये के शेयर हेल्थकेयर सेक्टर में 4,638 करोड़ रुपये के शेयर विदेशी निवेशकों ने मार्च के महीने में बेच डाले। इसके अलावा एफआईआई ने मार्च के महीने में टेलीकॉम सेक्टर में 5,603 करोड़ रुपये की, कंस्ट्रक्शन मटीरियल सेक्टर में 3,144 करोड़ रुपये की, सर्विसे सेक्टर में 2,575 करोड़ रुपये की, ऑयल एंड गैस सेक्टर में 4,129 करोड़ रुपये की और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में 2,900 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

