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लगातार दो दिन तेजी के बाद क्यों लुढ़का शेयर बाजार, एक्सपर्ट्स ने गिनाई वजहें

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लगातार दो दिन तेजी के बाद क्यों लुढ़का शेयर बाजार, एक्सपर्ट्स ने गिनाई वजहें


नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (हि.स.)। सप्ताह के पहले दिन ही दिग्गज कंपनियों के शेयरों में हुई भारी मुनाफावसूली के कारण आज भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट का रुख बन गया। माना जा रहा है कि लगातार दो दिनों की शानदार तेजी पर ब्रेक लगने की सबसे बड़ी वजह बैंकिंग सेक्टर के हैवीवेट शेयरों में आई बड़ी गिरावट रही। खासकर, देश में प्राइवेट सेक्टर के सबसे निजी बैंक एचडीएफसी बैंक के वीकेंड पर जारी हुए दूसरी तिमाही के नतीजों ने निवेशकों को निराश किया।

धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी के अनुसार एचडीएफसी बैंक की दूसरी तिमाीह के नतीजों के बाद बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर बढ़ते दबाव और अर्निंग्स ग्रोथ की सुस्त रफ्तार को लेकर घरेलू और विदेशी निवेशकों में चिंता साफ देखी गई। इसकी वजह से आज इस दिग्गज शेयर में करीब दो प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसने अकेले दम पर पूरे बाजार का मूड बिगाड़ दिया।

घरेलू मोर्चे पर आई इस कमजोरी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले बेहद कमजोर और नकारात्मक संकेतों ने और ज्यादा हवा दे दी। सोमवार के कारोबार के दौरान पूरे एशियाई बाजार में बिकवाली का माहौल बना रहा, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट के कारोबार पर भी पड़ा। प्रशांत धामी के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में भारी फंडिंग और बड़े निवेश को लेकर उपजी चिंताओं की वजह से आज टेक स्टॉक्स में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इसकी वजह से एमएससीआई एशिया इंडेक्स आधा प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान के निक्केई फ्यूचर्स में 1.3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

इसके अलावा हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी गिरावट के लाल निशान में ही कारोबार करते नजर आए। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी एआई और टेक शेयरों में मची भगदड़ और कच्चे तेल में आए उछाल की वजह से भारी गिरावट देखी गई थी, जहां नैस्डैक सूचकांक 2.19 प्रतिशत की बड़ी कमजोरी के साथ 26,128.13 अंक के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं एसएंडपी 500 और डाउ जोंस भी क्रमशः 1.22 प्रतिशत और 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए थे।

जानकारों का कहना है कि बाजार को डराने वाली एक और बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी हुई हैं। हालांकि, सोमवार को वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब डेढ़ प्रतिशत की नरमी के साथ 108.27 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 100.83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। कच्चे तेल की कीमत में आई आज की इस गिरावट के बावजूद जियो-पॉलिटिकल टेंशन और सप्लाई बाधित होने की आशंका की वजह से कच्चे तेल का भाव लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना हुआ है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है। ऐसी स्थिति में तेल की लगातार ऊंचे स्तर पर बनी कीमत भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट मुनाफे के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हो रहा है।

हालांकि, निगेटिव सेंटिमेंट्स के बीच एक पॉजिटिव बात ये है कि बाजार में आई गिरावट और बाजार में मचे कोहराम के बीच तकनीकी विश्लेषक और मार्केट एक्सपर्ट्स अभी भी बाजार के बुनियादी ढांचे को लेकर पूरी तरह निराश नहीं हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगस्त के बाद पहली बार पिछले कारोबारी सत्र में 20-डे सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से ऊपर क्लोजिंग मिलने की वजह से बाजार में ऊपर की ओर जाने की क्षमता अभी भी बची हुई है।

चूंकि, लोअर बोलिंगर बैंड से बाजार में चार प्रतिशत से ज्यादा की एकतरफा तेजी आ चुकी थी, इसलिए आज की इस गिरावट को एक सामान्य टेक्निकल करेक्शन या मीन रिवर्जन मूव के रूप में देखा जाना चाहिए। तकनीकी आउटलुक के लिहाज से जब तक निफ्टी में यह गिरावट 22,780 अंक के मजबूत सपोर्ट लेवल को नीचे की तरफ नहीं तोड़ती है, तब तक बाजार का शॉर्ट टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना रहेगा और ऊपर की ओर 23,600 अंक का बड़ा टारगेट पूरी तरह से एक्टिव और बरकरार रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक