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शुरुआती मजबूती के बाद किन वजहों से धराशायी हुआ शेयर बाजार

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शुरुआती मजबूती के बाद किन वजहों से धराशायी हुआ शेयर बाजार


नई दिल्ली, 28 अप्रैल (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में आज पूरे दिन जबरदस्त उतार-चढ़ाव होता रहा। कमजोर शुरुआत के बाद दिन के पहले सत्र में जहां तेजड़ियों का पलड़ा भारी नजर आया, वहीं दूसरे सत्र में मंदड़िये पूरी तरह से बाजार पर हावी हो गए। दिन के पहले सत्र में सेंसेक्स ओपनिंग लेवल से करीब 400 अंक उछला। वहीं दूसरे सत्र में इसने ऊपरी स्तर से 750 अंक से अधिक का गोता भी लगाया। इसी तरह निफ्टी पहले सत्र में ओपनिंग लेवल से 130 अंक से अधिक उछलने के बाद दूसरे सत्र में ऊपरी स्तर से करीब 225 अंक लुढ़क भी गया।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छी शुरुआत के बावजूद बाजार में आज आई गिरावट के लिए कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेत, जियो पॉलिटिकल टेंशन, घरेलू निवेशकों की मुनाफा वसूली, निफ्टी की एक्सपायरी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में हुई बिकवाली जैसे फैक्टर्स को जिम्मेदार माना जा सकता है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर दुनिया भर के बाजार में डर का माहौल बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर की शुरुआत नहीं हो पाने के कारण मार्केट सेंटीमेंट्स पर निगेटिव असर पड़ा है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य होने की संभावनाओं को भी झटका लगा है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर मार्केट सेंटीमेंट्स तो खराब हुए ही हैं, निवेशक भी अनिश्चय की स्थिति में पड़े हुए हैं। इस वजह से निवेशक नया निवेश करने की जगह मुनाफा वसूली करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते मालवाहक जहाजों और ऑयल टैंकर्स की आवाजाही लगभग ठप पड़ जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आज ब्रेंट क्रूड उछल कर 112 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। भारतीय समय के अनुसार शाम छह बजे ब्रेंट क्रूड 112.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 101.82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचा हुआ था।

कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी से भारत की अर्थव्यवस्था पर निगेटिव असर पड़ने का खतरा बन गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के महंगा होने से भारत के इंपोर्ट बिल में भी काफी बढ़ोतरी होने की आशंका बन गई है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ने और महंगाई बढ़ने की भी संभावना बन गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इस निगेटिव असर की आशंका ने भी घरेलू शेयर बाजार पर आज दबाव बनाने का काम किया।

जियो पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका की वजह से विदेशी संस्थागत निवेशक भी लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालने में जुटे हुए हैं। सोमवार के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 1,151.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसी तरह आज भी विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली करते रहे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली की वजह से भी घरेलू शेयर बाजार पर आज दबाव बना रहा।

इसी तरह घरेलू निवेशकों ने भी आज जमकर मुनाफा वसूली की। सोमवार के कारोबार में आई तेजी के बाद आज दिन के पहले सत्र में भी सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी बढ़त बनाई थी। इसकी वजह से घरेलू निवेशकों ने बिकवाली कर मुनाफा वसूली करना शुरू कर दिया। इस मुनाफा वसूली के कारण भी घरेलू शेयर बाजार पर लगातार दबाव बढ़ता चला गया।

आज की बिकवाली का सबसे अधिक असर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर पड़ा। दिन के कारोबार में निफ्टी का बैंक इंडेक्स लगभग दो प्रतिशत तक टूट गया। हालांकि बाद में इसमें निचले स्तर से रिकवरी भी हुई, जिसके कारण बैंक इंडेक्स 1.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में आज हुई बिकवाली का असर दूसरे सेक्टर्स पर भी पड़ा। खासकर, आईटी और रियल्टी सेक्टर भी बड़ी गिरावट का शिकार हो गए।

मंगलवार के दिन ही निफ्टी की एक्सपायरी होती है। निफ्टी की एक्सपायरी के कारण भी आज बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहा। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अपनी पोजिशन को या तो एडजस्ट करते हैं या फिर रोल ओवर करते हैं। ऐसा करने से इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान स्वाभाविक रूप से शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव होता है, जो अंततः बाजार की चाल को भी प्रभावित करता है।

ग्लोबल मार्केट से भी आज लगातार कमजोर संकेत मिलते रहे। एशिया के ज्यादातर बाजार आज कमजोरी के साथ कारोबार करते हुए नजर आए। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज के निक्केई इंडेक्स, चीन के शंघाई कंपोजिट इंडेक्स, हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स, इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स, ताइवान के ताइवान वेटेड इंडेक्स और सिंगापुर के स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स में लगातार कमजोरी बनी रही। इस कमजोरी ने भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना दिया।

शेयर बाजार के आज के कारोबार में आई गिरावट की एक बड़ी वजह रुपये की कीमत में आई गिरावट भी रही। आज के कारोबार में रुपया डॉलर की तुलना में 35 पैसा कमजोर होकर 94.55 रुपये प्रति डॉलर (अस्थाई) के स्तर पर आ गया। कच्चे तेल की कीमत में तेजी और महीने के आखिरी सप्ताह में इंपोर्ट बिल सेटलमेंट के कारण डॉलर की मांग में बढ़ोतरी की वजह से भी रुपये पर लगातार दबाव बना रहा। इस दबाव ने भी घरेलू शेयर बाजार के मूड को बिगाड़ने का काम किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक