home page

कच्चे तेल की कीमत में लगी आग से झुलसा स्टॉक मार्केट, पूरे दिन बाजार में मची रही अफरा तफरी

 | 
कच्चे तेल की कीमत में लगी आग से झुलसा स्टॉक मार्केट, पूरे दिन बाजार में मची रही अफरा तफरी


नई दिल्ली, 19 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी जंग और कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार तेजी के कारण घरेलू शेयर बाजार में आज कोहराम मच गया। चौतरफा बिकवाली के कारण दलाल स्ट्रीट में पूरे दिन अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बिकवाली के दबाव के कारण निफ्टी के सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। इसके पहले सोमवार से लेकर बुधवार तक लगातार तीन दिन घरेलू शेयर बाजार शानदार तेजी के साथ बंद होने में सफल रहा था, लेकिन आज हुई चौतरफा बिकवाली ने तीन दिन की बढ़त को एक झटके में खत्म कर दिया।

पिछले तीन कारोबारी दिन में सेंसेक्स 2,140.21 अंक उछलने में सफल रहा था। इसी तरह निफ्टी ने भी तीन दिन में 626.70 अंक की बढ़त हासिल की थी, लेकिन आज बाजार में हुई अंधाधुंध बिकवाली के कारण सेंसेक्स एक झटके में 2753.15 अंक टूटने के बाद मामूली सुधार के साथ 2,496.89 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी ने 847.45 अंक फिसलने के बाद मामूली रिकवरी कर 775.65 अंक की कमजोरी के साथ आज के कारोबार का अंत किया।

घरेलू शेयर बाजार में आज मचे हाहाकार के लिए कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार तेजी, कमजोर ग्लोबल संकेत, लगातार बढ़ रहा जियो पॉलिटिकल टेंशन, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख, घरेलू मोर्चे पर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई जबरदस्त गिरावट और इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (इंडिया वीआईएक्स) में हुई बढ़ोतरी को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन सात फैक्टर्स के कारण निफ्टी जून 2024 के बाद अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट का शिकार हो गया।

धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी के अनुसार घरेलू शेयर बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार तेजी रही। पश्चिम एशिया में जारी जंग के दौरान तेल और गैस के ठिकानों को निशाना बनाए जाने की वजह से कच्चे तेल की कीमत में अचानक जबरदस्त तेजी का माहौल बन गया। ब्रेंट क्रूड आज 118.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक उछल गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी उछल कर 100.02 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया।

हालांकि बाद में कच्चे तेल की कीमत में मामूली गिरावट भी आई। इसके बावजूद भारतीय समय के अनुसार शाम 5:30 बजे ब्रेंट क्रूड 113.58 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 97.12 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। अपनी जरूरत के लिए कच्चे तेल और गैस के आयात पर निर्भर रहने वाले भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी हमेशा ही निगेटिव न्यूज मानी जाती है। अगर ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के ऊपर बना रहा, तो इससे देश के इंपोर्ट बिल में जोरदार तेजी आ सकती है। ऐसा होने से देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

प्रशांत धामी के अनुसार बाजार में आई गिरावट की एक बड़ी वजह कमजोर ग्लोबल संकेत भी रहे। अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पिछले सत्र के दौरान बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे। एशियाई बाजार में भी आज लगातार दबाव बना रहा। एशिया के सभी एक्टिव स्टॉक एक्सचेंज आज गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते रहे। इसकी वजह से भी इन्वेस्टर सेंटीमेंट्स पर नकारात्मक असर पड़ा।

इसी तरह बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी आज लगातार बिकवाली का दबाव बनाए रखा। आज के पहले बुधवार को भी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 2,714 करोड़ रुपये से अधिक के शेयरों की बिकवाली की थी। शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकालने की वजह से भी बाजार की स्थिरता पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। प्रशांत धामी का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली स्पष्ट रूप से इन्वेस्टमेंट रिस्क का इशारा करती है। इसके साथ ही स्टॉक मार्केट से लगातार कैपिटल आउटफ्लो के कारण मार्केट की स्टेबिलिटी भी प्रभावित हुई है।

कैपेक्स गोल्ड एंड इन्वेस्टमेंट के सीईओ राजीव दत्ता का कहना है कि घरेलू मोर्चे पर आज एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई जोरदार गिरावट ने भी मार्केट सेंटीमेंट को खराब करने का काम किया। एचडीएफसी बैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद आज बैंक के शेयर मूल्य में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। दिन के कारोबार में एचडीएफसी बैंक के शेयर नौ प्रतिशत से अधिक टूट कर 770 रुपये के स्तर तक गिर गए। हालांकि बाद में इसने निचले स्तर से रिकवरी कर 5.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ आज के कारोबार का अंत किया। पिछले दो साल की अवधि में यह एचडीएफसी बैंक के शेयर में आई सबसे बड़ी इंट्रा-डे गिरावट है। एचडीएफसी बैंक के शेयर में आई इस जोरदार गिरावट से भी मार्केट सेंटीमेंट बुरी तरह से प्रभावित हुआ। राजीव दत्ता के अनुसार आज की गिरावट से बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

इसी तरह शेयर बाजार में इन्वेस्टर सेंटीमेंट्स को दिखाने वाला इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (इंडिया वीआईएक्स) में भी आज जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया वीआईएक्स आज उछल कर 21.72 के स्तर तक पहुंच गया। इस इंडेक्स में उछाल आने से आने वाले दिनों में बाजार में उतार चढ़ाव तेज होने के संकेत मिलते हैं। जिसकी वजह से निवेशकों के मन में डर का माहौल बनता है और वे अपना पैसा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का सहारा लेने लगते हैं।

घरेलू फैक्टर्स के अलावा राजीव दत्ता अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) के सख्त रवैये को भी भारत समेत दुनियाभर के बाजार की गिरावट का एक मुख्य कारण मानते हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों को तो स्थिर रखने का फैसला किया, लेकिन साथ ही महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत भी दिए। यूएस फेड की ओर से साफ किया गया है कि मौजूदा वैश्विक हालात में अमेरिका की आर्थिक स्थिति असामान्य रूप से अनिश्चित बनी हुई है। इसलिए इस साल ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश काफी कम है। ब्याज दर ऊंची रहने से भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट वाले देशों में निवेश को लेकर आकर्षण कम हो जाता है। इस वजह से भी भारत जैसे देश के स्टॉक मार्केट में आज दबाव बना रहा।

------------

हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक