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रुपये ने दिखाया दम, आरबीआई के दखल के बाद भारतीय मुद्रा में 13 साल की सबसे बड़ी तेजी

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रुपये ने दिखाया दम, आरबीआई के दखल के बाद भारतीय मुद्रा में 13 साल की सबसे बड़ी तेजी


नई दिल्ली, 02 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रुपये की कीमत में लगातार आ रही गिरावट को रोकने के लिए दखल देने के बाद भारतीय मुद्रा आज 13 साल की सबसे बड़ी रिकवरी करने में सफल रही। आज के कारोबार में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 92.82 के हाई लेवल तक पहुंची। हालांकि बाद में इसकी कीमत में गिरावट आई। पूरे दिन के कारोबार के बाद भारतीय मुद्रा 1.77 प्रतिशत की मजबूती के साथ 93.10 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई।

रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी मजबूती के साथ ही की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (करेंसी मार्केट) में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 1.25 रुपये की तेजी के साथ 93.53 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। कारोबार शुरू होने के बाद आरबीआई की दखल का परिणाम नजर आने लगा। इस दखल की वजह से रुपये की स्थिति में और सुधार आने लगा। इंट्रा-डे में रुपया डॉलर की तुलना में रिकवरी कर 92.82 के स्तर तक आ गया। पूरे दिन के कारोबार के बाद भारतीय मुद्रा 93.10 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुई। इसके पहले इसी सप्ताह रुपये ने 95 रुपये के भी नीचे लुढ़क कर कमजोरी का नया रिकॉर्ड बनाया था।

करेंसी मार्केट के आज के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) और यूरो के मुकाबले भी मजबूत प्रदर्शन किया। आज के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 2.86 रुपये की तेजी के साथ 122.91 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया आज 1.67 रुपये की मजबूती के साथ 107.32 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में बैंकों को ट्रेडिंग के सबसे मशहूर तरीके रूपी ऑफशोर को ऑफर करने से रोक दिया गया है। आरबीआई ने ये कदम लगातार गिर रहे हैं रुपये को संभालने के लिए सख्ती के तौर पर उठाया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम से रुपये की सट्टेबाजी पर रोक लगाई जा सकेगी। इसके साथ ही रुपये को भी प्रत्यक्ष सपोर्ट दिया जा सकेगा।

पिछले सप्ताह ही शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने लेंडर्स के डेली ओनशोर करेंसी पोजीशंस की अधिकतम सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी थी। आरबीआई के फैसले से बैंकों को कम से कम 3,000 करोड़ डॉलर के आर्बिट्राज ट्रेड को तत्काल बंद करना पड़ा। हालांकि आर्बिट्राज ट्रेड को बंद करने के बाद भी जब रुपये की गिरावट नहीं थमी, तो बैंकों को नॉन डिलीवरेबल डेरिवेटिव कांट्रैक्ट्स देने से मना कर दिया गया।

मंगलवार और बुधवार को करेंसी मार्केट में छुट्टी थी। इसके बाद गुरुवार को जब करेंसी ट्रेडिंग शुरू हुई, तो रुपये की चाल में 13 साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई। इस तेजी के कारण भारतीय मुद्रा दो प्रतिशत से अधिक की उछाल के साथ 92.82 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। इसी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को शुरूआती कारोबार में भारतीय मुद्रा 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे फिसल कर रिकॉर्ड गिरावट का शिकार हो गई थी।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले से इस बात का संकेत मिल रहा है कि अब वो कड़े फैसले लेने के लिए तैयार है। इसके साथ ही इस बात का भी संकेत मिल रहा है कि आरबीआई का ध्यान फिलहाल लिक्विडिटी की तुलना में रुपये की स्थिरता पर अधिक है।

हालांकि भंसाली का यह भी कहना है कि आरबीआई के ताजा फैसले की वजह से करेंसी मार्केट को मजबूत करने की उसकी सालों पुरानी मुहिम पर निगेटिव असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में ऑनशोर और ऑफशोर मार्केट में लिक्विडिटी काफी बढ़ गई है, जिसकी वजह से विदेशी निवेशक भी आकर्षित हुए हैं। ऐसी स्थिति में अगर आरबीआई द्वारा लागू की गई सख्ती लंबे समय तक जारी रही, तो निवेशकों और कारोबारियों को करेंसी रिस्क को हेज करने में परेशानी हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक