डॉलर की तुलना में रुपये ने बनाया ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड, 95.22 रुपये के स्तर तक लुढ़की भारतीय मुद्रा
- ऑल टाइम लो का रिकॉर्ड बनाने के बाद रुपये ने की शानदार रिकवरी
नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। रुपये की गिरावट रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप करने के बावजूद भारतीय मुद्रा ने सोमवार को एक बार फिर ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड बनाया। आज के कारोबार में भारतीय मुद्रा पहली बार 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे चली गई। हालांकि, दिन भर के कारोबार के बाद भारतीय मुद्रा ने निचले स्तर से शानदार रिकवरी कर 94.51 रुपये प्रति डॉलर (अनंतिम) के स्तर पर आज के कारोबार का अंत किया।
इसके पहले भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रुपये की लगातार कीमतों को थामने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप करने के बाद इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में आज भारतीय मुद्रा रुपये ने आज शानदार रिकवरी करते हुए 1.22 रुपये की मजबूती के साथ 93.59 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा सुधर कर 93.55 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। इस तरह बाजार खुलने के कुछ देर बाद ही रुपये ने पिछले सप्ताह के आखिरी दिन के क्लोजिंग लेवल से 1.26 रुपये की बढ़त बना ली। रुपये की ये तेजी टिक नहीं सकी। जैसे जैसे दिन का कारोबार आगे बढ़ा वैसे-वैसे रुपये की कमजोरी एक बार फिर बढ़ने लगी।
रुपये पर लगातार बढ़ रहे दबाव के कारण शाम तीन बजे के करीब भारतीय मुद्रा गिर कर 95 रुपये के स्तर को पार कर अभी तक के सबसे निचले स्तर 95.22 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गई। इसके बाद एक बार फिर रुपये की स्थिति में सुधार होने लगा। पूरे दिन के कारोबार के बाद रुपये ने डॉलर के मुकाबले 94.51 के स्तर पर आज के कारोबार का अंत किया। मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) और यूरो के मुकाबले भी मजबूत प्रदर्शन किया।
आज के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 61.74 पैसे की मजबूती के साथ 125.51 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह आज का कारोबार होने के बाद यूरो की तुलना में रुपया 20.57 पैसे की बढ़त के साथ 108.99 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ।शुक्रवार को ही भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों के लिए एक निर्देश जारी कर कहा था कि वे अगले दस अप्रैल तक हर कारोबारी दिन के अंत तक ऑनशोर मार्केट में नेट डॉलर-रुपी पोजिशन को दस करोड़ डॉलर तक सीमित रखें।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि नेट डॉलर-रुपी पोजिशन को सीमित करने से डॉलर की मांग में तेजी आने के बावजूद रुपये पर दबाव कम होने में मदद मिलेगी, जिससे भारतीय मुद्रा को कुछ सहारा मिल सकेगा। टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि रिजर्व बैंक के नियमन के बावजूद रुपये के आज ऑल टाइम लो तक जाने का सबसे प्रमुख कारण वैश्विक बाजार में पश्चिम एशिया की जंग को लेकर बना अफरा तफरी का माहौल था। इस जंग के कारण कच्चे तेल की कीमत भी आज 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई थी। और तो और स्टॉक मार्केट में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी डॉलर की मांग बढ़ा दी।
उन्होंने कहा कि इन सभी वजहों ने रुपये को आरबीआई के हस्तक्षेप के बावजूद 95.22 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक गिरा दिया। हालांकि, बाद में आरबीआई के नियमन की वजह से ही भारतीय मुद्रा ने शानदार रिकवरी की और पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन के मुकाबले बढ़त के साथ आज के कारोबार का अंत किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

