home page

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी किया

 | 
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी किया


मुंबई, 05 जून (हि.स)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया। रिजर्व बैंक पहले इसके 4.6 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जिंस कीमतों में झटके, मानसून को लेकर जारी अनिश्चितता और अल नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण महंगाई दर बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। संजय मल्होत्रा ने जून मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि इसका मुख्य कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों से कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी है। पेट्रोल की खुदरा कीमतों में मई से अब तक कुल 7.4 फीसदी और डीजल में 8.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खाद्य महंगाई में कुछ बढ़ोतरी हुई, जबकि मार्च और अप्रैल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने से ईंधन की महंगाई दर नियंत्रित रही।

उन्होंने बताया कि फरवरी में 3.2 फीसदी से थोड़ा बढ़ने के बावजूद मार्च और अप्रैल में कुल खुदरा महंगाई दर लक्ष्य से नीचे (क्रमशः 3.4 फीसदी और 3.5 फीसदी) रही। मुख्य महंगाई मार्च-अप्रैल के दौरान 3.7 फीसदी पर स्थिर रही। वहीं, कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई इसी अवधि में और कम होकर 2.1-2.2 फीसदी रही। मल्होत्रा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें (भारत पर भार) अप्रैल-मई, 2026 के दौरान औसतन लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल रही हैं। ऐसे संकेत हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत कीमतें पिछली अनुमानित स्तर से काफी अधिक रहेंगी।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और कई कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण अप्रैल, 2026 में थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) में तेज उछाल देखा गया। तिमाही आधार पर खुदरा महंगाई दर का अनुमान पहली तिमाही में 4.2 फीसदी, दूसरी में 5.1 फीसदी, तीसरी में 5.9 फीसदी और चौथी में 5.4 फीसदी लगाया गया है। साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल महंगाई 4.7 फीसदी रहने का अनुमान है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान और अल नीनो के कारण खाद्य परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के जोखिम बढ़े हैं, लेकिन मौद्रिक नीति समिति ने समीक्षा बैठक में अधिक स्पष्टता आने तक इंतजार करना उचित समझा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर