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एनएमडीसी-आईआईटी हैदराबाद में करार, खनन अनुसंधान और खोज को मिलेगी दिशा

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एनएमडीसी-आईआईटी हैदराबाद में करार, खनन अनुसंधान और खोज को मिलेगी दिशा


नई दिल्ली, 26 फरवरी (हि.स)। सार्वजनिक क्षेत्र की जिम्मेवार खनिक एनएमडीसी के अनुसंधान एवं विकास केंद्र ने भारत के खनिज और धातु क्षेत्र के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में हैदराबाद के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस्पात मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि खनिज प्रसंस्करण और संबद्ध क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एनएमडीसी के अधिशासी निदेशक (आरएंडडी) संजीव साही और आईआईटी हैदराबाद के डीन (प्रायोजित अनुसंधान और परामर्श) ने आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी. एस. मूर्ति की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। मंत्रालय ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य खनन और धातुकर्म क्षेत्र में नवाचार, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और टिकाऊ औद्योगिक समाधान को बढ़ावा देना है। मंत्रालय के अनुसार यह साझेदारी फील्ड की विशेषज्ञता और अकादमिक उत्कृष्टता के बीच एक मजबूत सहयोग का प्रतिनिधित्व करती है।

खनन अनुसंधान में नए आयाम

इस सहयोग के तहत दोनों संस्थान लौह अयस्क बेनीफिशिएशन और एग्लोमेरेशन, हरित इस्पात निर्माण प्रौद्योगिकियों, स्वदेशी कच्चे माल पर आधारित वैकल्पिक लौह निर्माण और खनन-धातुकर्म प्रक्रियाओं के उन्नत मॉडलिंग एवं सिमुलेशन में अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही प्राथमिक और माध्यमिक स्रोतों से महत्वपूर्ण और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के उत्खनन में भी नए रास्ते विकसित किए जाएंगे, जिससे देश की खनिज सुरक्षा और संसाधन उपलब्धता मजबूत होगी।

डिजिटल माइनिंग और उन्नत तकनीक पर फोकस

एमओयू के तहत स्वायत्त वाहन संचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), माइनिंग 4.0 फ्रेमवर्क और ड्रोन आधारित सर्वेक्षण व निगरानी जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और पायलट परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। यह पहल परिचालन दक्षता, उत्पादकता और पर्यावरण प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी आधारित समाधान विकसित करेगी।

एनएमडीसी की नवाचार प्रतिबद्धता

एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि आईआईटी हैदराबाद के साथ यह उद्योग-अकादमिक गठजोड़ नवाचार के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि संस्थान की अनुसंधान क्षमता और एनएमडीसी की डोमेन विशेषज्ञता मिलकर खनन और खनिज प्रसंस्करण में स्वदेशी तकनीकों के विकास को गति देगी, जो सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान देगा।

आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी विरासत को बल

यह साझेदारी नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने और अनुसंधान को औद्योगिक अनुप्रयोगों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही यह सहयोग उस समय हुआ है जब एनएमडीसी का अनुसंधान एवं विकास केंद्र खनिज क्षेत्र में योगदान के 50 वर्ष पूरे कर रहा है, जो संस्थान की तकनीकी उत्कृष्टता की विरासत को और सुदृढ़ करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर