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भारत-यूके सीईटीए के तहत जयपुर से पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना

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भारत-यूके सीईटीए के तहत जयपुर से पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना


जयपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत बुधवार को जयपुर के सांगानेर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे स्थित एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से यूनाइटेड किंगडम के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना की गई। लगभग 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की इस खेप में स्वर्ण, हीरा जड़ित, रजत तथा प्लेटिनम आभूषण शामिल हैं।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में अतिरिक्त आयुक्त (सीमा शुल्क) नीरज दुबे, अतिरिक्त आयुक्त (सीमा शुल्क) सुनीता वर्मा, उप आयुक्त (सीमा शुल्क) जितेंद्र मीणा तथा जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के राजस्थान क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग उपस्थित रहे। यह फ्लैग-ऑफ देशव्यापी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली, मुंबई, सूरत, चेन्नई और कोलकाता सहित विभिन्न शहरों से भी सीईटीए के अंतर्गत यूनाइटेड किंगडम के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना की जा रही है।

सीमा शुल्क आयुक्त आर.के. चंदन ने कहा कि भारत-यूके सीईटीए के तहत पहली निर्यात खेप का प्रेषण भारत की निर्यात यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। सीमा शुल्क विभाग त्वरित और सुगम क्लीयरेंस के माध्यम से व्यापार को निरंतर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि यह समझौता भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए नए युग की शुरुआत है। इसके लागू होने से भारतीय निर्यातकों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा तथा वहां लगने वाला चार प्रतिशत तक का आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात, निवेश तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने बताया कि शून्य शुल्क सुविधा मिलने से भारत का यूनाइटेड किंगडम को रत्न एवं आभूषण निर्यात अगले तीन वर्षों में लगभग 754 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।

जीजेईपीसी के राजस्थान क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग ने कहा कि जयपुर अपनी रंगीन रत्नों, हस्तनिर्मित आभूषणों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। सीईटीए के माध्यम से राजस्थान के रत्न एवं आभूषण उद्योग को बाजार तक बेहतर पहुंच, मूल्य संवर्धित विनिर्माण, रोजगार सृजन, कौशल विकास तथा एमएसएमई, कारीगरों और निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा वर्ष 1966 में स्थापित जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल देश की प्रमुख निर्यात संवर्धन परिषदों में से एक है। इसके 11 हजार से अधिक सदस्य हैं तथा मुख्यालय मुंबई के अलावा नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत और जयपुर में क्षेत्रीय कार्यालय संचालित हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर