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वित्त मंत्रालय ने एमएसएमई को सहायता देने के लिए 'म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना' में किए बदलाव

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वित्त मंत्रालय ने एमएसएमई को सहायता देने के लिए 'म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना' में किए बदलाव


नई दिल्ली, 21 मार्च (हि.स)। केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 के अनुरूप सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम(एमएसएमई) निर्माताओं एवं निर्यातकों को बढ़ावा देने के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना में संशोधन किया है। इस संशोधनों से कवरेज बढ़ेगा, अनुपालन का बोझ कम होगा और निर्यातक एमएसएमई को लक्षित प्रोत्साहन मिलेगा।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) द्वारा प्लांट, मशीनरी और उपकरणों की खरीद के लिए 100 करोड़ रुपये तक के लोन गारंटी कवरेज के लिए पात्र होंगे। ये एमएसएमई निर्माताओं और निर्यातकों को सहायता देनेवाली 'म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना' (एमसीजीएस-एमएसएमई) में किए गए बदलावों के कारण संभव हो पाएगा।

मंत्रालय के मुताबिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और ऋणदाता संस्थानों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर कुछ संशोधन किए गए हैं।

मौजूदा “एमसीजीएस-एमएसएमई” योजना में संशोधन:

अग्रिम अंशदान:- 5 फीसदी अग्रिम अंशदान वापसी योग्य है, चौथे वर्ष से आगे प्रत्येक वर्ष 1 फीसदी वापसी योग्य है, बशर्ते ऋण खाते का प्रदर्शन संतोषजनक हो।

पात्रता:- सेवा क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी इस योजना में शामिल किए गए हैं।

मशीनरी/उपकरणों के लिए न्यूनतम परियोजना लागत:- उपकरणों/मशीनरी की लागत परियोजना लागत के 60 फीसदी तक कम कर दी गई है (पहले यह 75 फीसदी थी)।

गारंटी की अवधि:- गारंटी 10 वर्षों के बाद समाप्त हो जाएगी।

निर्यातकों के लिए योजना में विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं :-

पात्र निर्यातक :- लाभ कमाने वाली इकाइयां जिन्होंने पिछले 3 वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक में अपने बिक्री कारोबार का कम से कम 25 फीसदी निर्यात किया हो और कुछ निर्यात प्राप्ति शर्तों को पूरा करती हों।

गारंटीकृत ऋण राशि :- 20 करोड़ रुपये है।

अग्रिम योगदान :- ऋण राशि का 2 फीसदी (अधिकतम 40 लाख रुपये), गारंटी अवधि के चौथे और पांचवें वर्ष में 1 फीसदी की वापसी।

गारंटी कवरेज:- डिफ़ॉल्ट राशि का 75 फीसदी है।

गारंटी शुल्क:- पहले वर्ष में शून्य, उसके बाद प्रत्येक वर्ष बकाया ऋण का 0.50 फीसदी है। संशोधित योजना का विवरण www.ncgtc.in (एनसीजीटीसी वेबसाइट) पर उपलब्ध है।

इसका प्रमुख प्रभाव:-

भारत के सकल घरेलू उत्पादन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का योगदान लगभग 30 फीसदी और निर्यात में 45 फीसदी से अधिक है, जिससे 35 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिलता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ एमएसएमई की आवश्यकता है। एमसीजीएस-एमएसएमई योजना में किए गए संशोधनों से एमएसएमई, जिनमें निर्यातक एमएसएमई भी शामिल हैं, उनको संयंत्र और मशीनरी/उपकरणों की खरीद के लिए ऋण की उपलब्धता में वृद्धि होने की उम्मीद है जिससे भारत के विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना (एमसीजीएस-एमएसएमई) जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। यह योजना राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) को एमसीजीएस-एमएसएमई के तहत पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को उपकरण/मशीनरी की खरीद के लिए स्वीकृत 100 करोड़ रुपये तक की ऋण सुविधा के लिए 60 फीसदी गारंटी कवरेज प्रदान करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर