home page

यूरोप की कार कंपनियां भारत में विनिर्माण को देंगी प्राथमिकता, देश बनेगा वैश्विक केंद्र : गोयल

 | 
यूरोप की कार कंपनियां भारत में विनिर्माण को देंगी प्राथमिकता, देश बनेगा वैश्विक केंद्र : गोयल


यूरोप की कार कंपनियां भारत में विनिर्माण को देंगी प्राथमिकता, देश बनेगा वैश्विक केंद्र : गोयल


नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि यूरोप के नियमों के कारण वहां वाहनों का विनिर्माण प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाएगा। गोयल ने कहा कि ऐसे में यूरोप की सभी कार कंपनियां अब भारत में विनिर्माण करना पसंद करेंगी। उन्होंने कहा कि निर्यात और आयात, दोनों बढ़ रहे हैं। इससे घरेलू उद्योग और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को प्रोत्साहन मिलता है। हमारे युवाओं को पब्लिक पॉलिसी और राष्ट्र-निर्माण के कामों में सकारात्मक रूप से शामिल होते देखना हमेशा खुशी की बात होती है।

‘द डिल्ली डायलॉग’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आखिरकार भारत कार विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है। गोयल ने आगे कहा कि सभी कंपनियां भारत आएंगी और यहां विनिर्माण करेंगी। केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में यूरोपीय संघ के किसी नियम का विस्तार से उल्लेख नहीं किया। हालांकि, भारत और कुछ अन्य देशों ने ईयू की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था (सीबीएएम) को लेकर चिंता जताई है। भारत के निर्यात के बारे में गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल एक लाख करोड़ डॉलर का निर्यात हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।

आईएसपीपी और चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की ओर से नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित 'द दिल्ली डायलॉग 2026' में 'विकसित भारत 2047' के विजन को लेकर नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और उत्साहित युवाओं के साथ सार्थक बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों के तहत ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) को कोटा आधारित शुल्क रियायतें दी हैं। ब्रिटेन के साथ समझौता 15 जुलाई से लागू हो गया था, जबकि यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है।

गोयल ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की शानदार मजबूती और विकास की गति पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हमारे युवाओं को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए और पॉलिसी बनाने में नए नजरिए, इनोवेटिव आइडिया और एक मज़बूत मकसद के साथ योगदान देना चाहिए। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हमारे युवाओं की ऊर्जा और उम्मीदें भारत के भविष्य के प्रति भरोसा जगाती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि वे सिर्फ़ भारत की विकास गाथा के उत्तराधिकारी ही नहीं, बल्कि इसके निर्माता भी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी महत्वाकांक्षा और दृढ़ संकल्प ही भारत को और ज्यादा समृद्धि वाले भविष्य की ओर ले जाएंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर