बचत से सशक्तिकरण तक: सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए भारत की बालिकाओं का सशक्तिकरण
नई दिल्ली, 21 जनवरी (हि.स)। सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) देशभर में लाखों युवा लड़कियों के लिए आशा और सशक्तिकरण का एक सशक्त प्रतीक है। एसएसवाई, उनके सपनों को संजोने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस योजना की शुरुआत से दिसंबर, 2025 तक 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जबकि कुल जमा राशि 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
भारत सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत 22 जनवरी, 2015 को शुरू की गई यह योजना महज़ बचत के लिए की गई पहल से कहीं अधिक थी। इसे वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक परिवर्तन के बीच एक सेतु के रूप में तैयार किया गया था। परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा और कल्याण के लिए जल्दी योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करके, एसएसवाई ने जमीनी स्तर पर आत्मविश्वास, समावेश और दीर्घकालिक प्रगति की भावना पैदा करने में मदद की है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक 22 जनवरी, 2026 को सुकन्या समृद्धि योजना के 11 वर्ष पूरे होने पर यह लाखों परिवारों के अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य में सामूहिक विश्वास का प्रमाण है। इसकी शुरूआत से अब तक 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। हर खाता बालिकाओं की क्षमता में भरोसे की कहानी कहता है, जो साबित करता है कि एक बालिका को सशक्त बनाने से परिवार, समुदाय और अंततः राष्ट्र सशक्त बनता है और इस तरह सुकन्या समृद्धि योजना समानता और अवसर की दिशा में एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन रही है।
बेटियों के लिए समर्पित बचत योजनाओं में वर्तमान ब्याज दर 8.2 फीसदी प्रति वर्ष है, जो बेटियों के लिए समर्पित बचत योजनाओं में सबसे अधिक है। सुकन्या समृद्धि योजना एक कम जोखिम वाली जमा योजना है, जिसमें सरकार मूलधन की गारंटी देती है और ब्याज का भुगतान प्रत्येक तिमाही में निर्धारित दरों के अनुसार वार्षिक रूप से किया जाता है। इस योजना का आर्थिक और सामाजिक महत्व है, यह मात्र एक वित्तीय निवेश नहीं है, बल्कि बालिकाओं के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य को सुरक्षित करने का उत्प्रेरक है।
इस योजना का मकसद बालिकाओं की शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करना है। शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर, यह पहल महिला सशक्तिकरण को मजबूत करती है। इसके साथ ही भविष्य में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना में योगदान देती है। एसएसवाई खाता वह खाता है, जिसमें एसएसवाई योजना के तहत जमा की गई धनराशि रखी जाती है। माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपनी भारतीय बालिका के लिए किसी भी भारतीय डाकघर या किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और अधिकृत निजी क्षेत्र के बैंकों (एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक) की शाखा में खाता खोल सकते हैं।
योजना के तहत खाता खोलने और अन्य जानकारी:-
सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता बालिका के जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक कभी भी खोला जा सकता है। एक बालिका का केवल एक एसएसवाई खाता खोला जा सकता है और एक परिवार अधिकतम दो बालिकाओं के लिए खाते खोल सकता है। हालांकि, जुड़वां या तीन जुड़वां बच्चों के मामले में, संबंधित जन्म प्रमाण पत्र के साथ शपथ पत्र जमा करने पर दो से अधिक खाते खोलने की अनुमति है। यह खाता भारत में किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। खास बात ये है कि जब तक बालिका 18 वर्ष की नहीं हो जाती, तब तक खाता माता-पिता/अभिभावक द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इससे अभिभावक बचत की निगरानी कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि धनराशि का उपयोग बालिका की शिक्षा और भविष्य की ज़रुरतों के लिए प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। 18 वर्ष की आयु होने पर, खाताधारक ज़रुरी दस्तावेज जमा करके स्वयं खाते का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।
इस खाता को खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज:-
एसएसवाई खाता खोलने के लिए चार मुख्य दस्तावेज आवश्यक हैं:- सुकन्या समृद्धि खाता खोलने का फॉर्म, जो बैंकों/डाकघरों में उपलब्ध है। बालिका का जन्म प्रमाण पत्र, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा जारी आधार संख्या, स्थायी खाता संख्या या आयकर नियमों में परिभाषित फॉर्म 60 है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

