बजट सत्र में पेश हो सकता है लागत-अनुरूप प्रावधानों वाला विद्युत संशोधन विधेयक: मनोहर लाल
नई दिल्ली, 21 जनवरी (हि.स)। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को कहा कि आगामी बजट सत्र में विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया जा सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य संघीय संतुलन बनाए रखना, सहकारी संचालन को बढ़ावा देना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना और क्षेत्र की दक्षता में सुधार करना भी है।
केंद्रीय विद्युत मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय बिजली वितरण कंपनियों के संघ (एआईडीए) के पहले वार्षिक सम्मेलन ‘ईडीआईसीओएन 2026’ के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह बात कही। मनोहर लाल ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति मूल्य श्रृंखला- उत्पादन, पारेषण एवं वितरण में बिजली वितरण कंपनियां एक अहम कड़ी हैं।
मनोहर लाल ने कहा कि “आने वाले समय में पावर सेक्टर बहुत बड़ा होने वाला है और बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को ऐसे पावर सेक्टर की जरूरत है, जो आज हमारी सोच से कहीं ज्यादा मज़बूत हो। ऐसे हालात में हमारे बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का मजबूत, समृद्ध और फाइनेंशियली पावरफुल होना बहुत जरूरी है।’’
केंद्रीय विद्युत मंत्री ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से ‘बी2सी’ (व्यवसाय-से-उपभोक्ता) सेवाएं प्रदान करती हैं और सेवा गुणवत्ता तथा अन्य मुद्दों पर ग्राहकों की शिकायतें सबसे पहले इन्हीं के पास आती हैं। मनोहर लाल ने कहा, “हम बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान ला रहे हैं। इसमें बिजली आपूर्ति से जुड़ी सभी लागतों को शुल्क में शामिल किया जाएगा, जिससे बिजली वितरण कंपनियों के घाटे कम होंगे। यह विधेयक संसद के इस (बजट) सत्र में लाया जा सकता है। इसके सुचारु पारित होने के लिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।’’
उन्होंने बताया कि मसौदा राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में भी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे तथा कर्ज को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान किया गया है। विद्युत मंत्रालय ने हितधारकों से इस पर सुझाव मांगे हैं। मंत्री ने कहा कि लागत-अनुरूप शुल्क से बिजली वितरण कंपनियों को लाभ कमाने में मदद मिलेगी जिसका उपयोग ‘क्रॉस-सब्सिडी’ के लिए किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘क्रॉस-सब्सिडी’ नियमों के अनुसार ही दी जानी चाहिए।
विद्युत मंत्री मनोहर लाल बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क की अवधारणा को विद्युत संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। इसे आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। देश में लंबे समय से कर्ज में डूबी और घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों की पृष्ठभूमि में लागत-अनुरूप शुल्क का महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने एआईडीए की अवॉर्ड पहल की तारीफ की और फिर से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में, हम एक मज़बूत, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार डिस्ट्रीब्यूशन इकोसिस्टम के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

