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“नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी समाज की सच्ची सेवा नहीं कर सकता”: उपराष्ट्रपति

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“नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी समाज की सच्ची सेवा नहीं कर सकता”: उपराष्ट्रपति


“नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी समाज की सच्ची सेवा नहीं कर सकता”: उपराष्ट्रपति


-चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से ओडीओपी पहल के तहत स्थानीय उद्यमों को सहयोग देने का आग्रह किया

“अपनी परीक्षा के मानकों को कभी कमज़ोर न करें; आप व्यवस्था की रक्षा कर रहे हैं”: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली, 01 जुलाई (हि.स)। देश के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स भरोसे के दूत हैं और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में उनका विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी समाज की सच्ची सेवा नहीं कर सकता”।

उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) के 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। सी.पी. राधाकृष्णन ने आगे कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक सुशासन सुनिश्चित करता यह पेशा भारत के आर्थिक एवं संस्थागत विकास का केंद्र है।

आईसीएआई के 78वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भरोसे के दूत बताया। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को विकसित भारत की दिशा में भारत की प्रगति के साथ इस पेशे से नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी सही मायने में समाज की सेवा नहीं कर सकता।

उपराष्ट्रपति ने भारत के आर्थिक विकास में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के पेशे के योगदान की सराहना की और कठोर परीक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए आईसीएआई की प्रशंसा की। उन्होंने संस्थान से इन मानकों को कभी कमज़ोर न करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह व्यवस्था की रक्षा कर रहा है। पिछले एक दशक में भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि देश कम समय में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर अब तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि यद्यपि आर्थिक उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत @2047 का विजन पारदर्शी शासन, विश्वसनीय संस्थानों, समावेशी अवसरों और प्रत्येक नागरिक की समृद्धि पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी सही मायने में समाज के लिए लाभकारी नहीं हो सकता।

प्रसिद्ध तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि केवल धर्मसम्मत साधनों से अर्जित धन ही स्थायी सुख प्रदान करता है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से ईमानदार उद्यमों की रक्षा करके तथा अनैतिक प्रथाओं के विरुद्ध दृढ़तापूर्वक कार्य करके निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यद्यपि कारोबार सुगमता आवश्यक है, लेकिन इसका संचालन सदैव कानून के दायरे में होना चाहिए, और इस संतुलन को सुनिश्चित करने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

ऐतिहासिक राष्ट्रीय सुधारों में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के पेशे के योगदान को स्वीकार करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने जीएसटी, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण पहलों तथा कराधान प्रणाली में सुधारों के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि उनकी विशेषज्ञता ने पारदर्शिता को सुदृढ़ किया है, अनुपालन में सुधार किया है तथा निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया है।

पेशेवरों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने उन्हें स्मरण कराया कि उनके द्वारा किया गया प्रत्येक अंकेक्षण, प्रमाणित की गई प्रत्येक तुलन-पत्र तथा परामर्श प्रदान की गई प्रत्येक संस्था का व्यवसायों, सरकारों और समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने उनसे अपने पूरे व्यावसायिक जीवन में सत्यनिष्ठा के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने का आग्रह किया।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को स्थानीय उद्यमों को सहयोग देने में अपनी भूमिका बढ़ाने का सुझाव देते हुए उपराष्ट्रपति ने आईसीएआई के जिला-स्तरीय संघों को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल के अंतर्गत चिन्हित उत्पादों का व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी विशेषज्ञता उन्हें गुणवत्ता से समझौता किए बिना लागत कम करने के संबंध में उत्पादकों का मार्गदर्शन करने में सक्षम बनाएगी, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्थाएँ सुदृढ़ होंगी।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आईसीएआई के पीयर रिव्यू बोर्ड (पीआरबी) वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के उपलक्ष्य में तथा समारोहों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मायगव के सहयोग से विकसित आईसीएआई जन उत्सव पोर्टल का भी शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम में आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी, आईसीएआई के उपाध्यक्ष मंगेश पी. किनारे, केंद्रीय परिषद के सदस्य, संस्थान के पूर्व अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि के साथ-साथ देशभर से आए चार्टर्ड अकाउंटेंट तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर