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जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की संभावना

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जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की संभावना


नई दिल्ली, 03 सितंबर (हि.स.)। रक्षाबंधन पर हुए बड़े कारोबार के बाद अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इस वर्ष देशभर में चालीस हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार होने की संभावना है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह अनुमान विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों में संभावित बिक्री, धार्मिक एवं घरेलू खरीदारी, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर होने वाले व्यय, देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों तथा धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों के आधार पर जारी किया है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों का अद्भुत संगम भी है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी ऐसा पर्व है, जिसमें आस्था सीधे आर्थिक गतिविधियों में परिवर्तित होती दिखाई देती है।

खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी केवल आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ की जीवंत शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पूजा-अर्चना से लेकर धार्मिक पर्यटन तक, जन्माष्टमी करोड़ों लोगों की आजीविका और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा महापर्व है।

कैट महामंत्री ने कहा कि भारत त्योहारों का देश है और देश का प्रत्येक पर्व केवल सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि व्यापक आर्थिक गतिविधियों का भी आधार बनता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान का प्रभाव त्योहारों के बाजारों में अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

खंडेलवाल ने कहा कि अब उपभोक्ता बड़ी संख्या में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को व्यापक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर पूजा सामग्री से लेकर सजावटी वस्तुओं और धार्मिक उत्पादों तक अधिकांश मांग स्वदेशी वस्तुओं की है।

खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ा प्रत्येक अनुष्ठान और आयोजन किसी न किसी रूप में लाखों लोगों की आजीविका से भी जुड़ा हुआ है। किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई के कारोबारी, वस्त्र विक्रेता, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, रेस्तरां संचालक तथा सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग इस पर्व से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।

वहीं, कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया के अनुसार वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस वर्ष उपभोक्ता मांग में हुई वृद्धि, वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन, त्योहारों के बढ़ते सामाजिक विस्तार, धार्मिक पर्यटन में वृद्धि तथा आधुनिक रिटेल एवं डिजिटल खरीदारी के विस्तार को देखते हुए लगभग 30 फीसदी वृद्धि के साथ ये व्यापार 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है।

भरतिया ने कहा कि कैट द्वारा किए गए आकलन के अनुसार जन्माष्टमी से जुड़े व्यापार में प्रमुख हिस्सेदारी मिठाई, माखन-मिश्री एवं डेयरी उत्पाद 20 फीसदी, पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत एवं पूजन किट 10 फीसदी, फूल, मालाएं एवं सजावट सामग्री 12 फीसदी, पारंपरिक परिधान एवं वस्त्र 10 फीसदी, फल, सूखे मेवे एवं प्रसाद सामग्री 10 फीसदी, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले एवं श्रृंगार सामग्री 8 फीसदी, उपहार, खिलौने एवं घरेलू सजावटी सामग्री 5 फीसदी, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन व अन्य सेवाएं 15 फीसदी, जबकि अन्य उपभोक्ता वस्तुएं 10 फीसदी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष बाजारों में माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर एवं अन्य डेयरी उत्पादों, मिठाइयों, फलों, सूखे मेवों, पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, बंदनवार, झूलों, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषणों तथा विशेष परिधानों की मांग विशेष रूप से बढ़ी हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर