संकट और नई उम्मीदों के बीच झूलता बुनकर उद्योग
भागलपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। जिले के बुनकर उद्योग की वर्तमान स्थिति संकट और नई उम्मीदों के बीच झूल रही है। एक तरफ जहां वैश्विक मंदी, कच्चे माल की कमी और पुरानी तकनीक के कारण 50 हजार से अधिक बुनकर परिवार पलायन और मंदी की मार झेल रहे हैं, वहीं केंद्रीय बजट 2026 और टेक्सटाइल पार्क की नई योजनाओं ने इस ऐतिहासिक सिल्क सिटी को पुनर्जीवित करने की एक नई आस भी जगाई है।
भागलपुर के बुनकर क्षेत्रों में चंपानगर, नाथनगर, नरगा और पुरैनी मुख्य रूप से शामिल हैं। मध्य-पूर्व (अमेरिका-ईरान) संकट के कारण भागलपुरी सिल्क का अंतरराष्ट्रीय बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हाल ही में खाड़ी देशों में जाने वाला करीब 25 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर अचानक रद्द हो गया, जिससे स्थानीय फैक्ट्रियों में तैयार माल डंप पड़ा है। सिल्क धागे (यार्न) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। चीन और अन्य देशों से आने वाले सस्ते सिंथेटिक कपड़ों के मुकाबले स्थानीय तसर सिल्क की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन अत्याधुनिक मशीनों के दम पर कब्जा जमा रहा है, जबकि भागलपुर के अधिकांश बुनकर आज भी पुरानी मशीनों और 'जुगाड़' तकनीक पर निर्भर हैं।
आधुनिकीकरण के अभाव में कपड़ों की फिनिशिंग वैश्विक स्तर की नहीं हो पा रही है। बैंकों से समय पर बिना गारंटी के लोन न मिलने के कारण छोटे बुनकर स्थानीय महाजनों से 5% मासिक तक के ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हैं। कर्ज के बोझ और कम दिहाड़ी मजदूरी के चलते कई बुनकर अपने लूम बंद कर सब्जी बेचने या दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए पलायन कर रहे हैं। इन तमाम चुनौतियों के बीच, सरकार द्वारा इस पारंपरिक उद्योग को बचाने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय बजट 2026 के प्रावधानों के अनुसार भागलपुर को एक प्रमुख सिल्क निर्यात केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय द्वारा डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डायरेक्ट मार्केट एक्सेस की व्यवस्था की जा रही है ताकि बिचौलियों का नियंत्रण खत्म हो सके। भागलपुर में नए टेक्सटाइल पार्क, सिल्क मिल और एक समर्पित यार्न बैंक स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे बुनकरों को स्थानीय स्तर पर ही सही कीमत पर कच्चा माल मिल सकेगा।
बुनकर मुद्रा योजना के तहत मिलने वाले ऋण की सीमा को बढ़ा दिया गया है, जिससे छोटे कारीगरों को पूंजी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में बुनकरों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनका डेटाबेस तैयार करने के लिए क्षेत्र में एक व्यापक शोध भी शुरू किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

