बीएयू सबौर द्वारा विकसित ‘पोर्टेबल सोलर-पावर्ड वीडर’ के डिज़ाइन को प्रदान किया डिज़ाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र
भागलपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। कृषि यंत्रीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है।
विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पोर्टेबल सोलर-पावर्ड वीडर के अभिनव औद्योगिक डिज़ाइन को भारत सरकार के पेटेंट, डिज़ाइन एवं ट्रेड मार्क महानियंत्रक द्वारा डिज़ाइन पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के नेतृत्व, कृषि अभियंत्रण विभागाध्यक्ष ई. अशोक कुमार की देखरेख में कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिकों की टीम के सतत अनुसंधान एवं नवाचार का परिणाम है।
विकसित पोर्टेबल सोलर-पावर्ड वीडर को विशेष रूप से छोटे एवं मंझोले किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अभिकल्पित किया गया है। यह मशीन सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता समाप्त करती है तथा कृषि कार्यों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है। मशीन 1.0 से 1.5 किलोमीटर प्रति घंटा की कार्य गति से 200–500 मिमी कतार दूरी वाली फसलों में 30–40 मिमी की कार्य गहराई पर प्रभावी रूप से यांत्रिक खरपतवार नियंत्रण करने में सक्षम है।
पारंपरिक खरपतवार नियंत्रण पद्धतियों की तुलना में यह तकनीक श्रम-आधारित निर्भरता को कम करती है, संचालन लागत में कमी लाती है तथा डीज़ल आधारित उपकरणों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को घटाकर जलवायु-स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नवाचार सटीक कृषि, सतत कृषि यंत्रीकरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि उपकरणों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह तकनीक भारत सरकार के विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, हरित ऊर्जा मिशन तथा कृषि में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप है। इस तकनीक के विकास में डॉ. मनीष कुमार, ई. अशोक कुमार, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. सनोज कुमार एवं डॉ. अनिल कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसी वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय नवाचारों को विकसित करना है जो प्रयोगशाला से निकलकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचें। पोर्टेबल सोलर-पावर्ड वीडर का डिज़ाइन पंजीकरण न केवल हमारे वैज्ञानिकों की अनुसंधान उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की नवाचार-आधारित कृषि विकास की प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है।
निदेशक (अनुसंधान) डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि आज कृषि अनुसंधान का वास्तविक मूल्य तभी है, जब विकसित तकनीक किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में प्रत्यक्ष योगदान दे। पोर्टेबल सोलर-पावर्ड वीडर इसी सोच का परिणाम है। इसका डिज़ाइन पंजीकरण विश्वविद्यालय की बौद्धिक संपदा सृजन क्षमता, अनुसंधान उत्कृष्टता तथा नवाचार संस्कृति का प्रमाण है। हमारा लक्ष्य ऐसी स्वदेशी, किफायती एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल तकनीकों का विकास करना है जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ एवं लाभकारी बनाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

