तटबंधों से टकरा रही उफनती धारा, रतजगा करने को मजबूर ग्रामीण; कई घरों में घुसा बाढ़ का पानी
भागलपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में जारी उतार-चढ़ाव के बीच तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
भले ही बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नवगछिया स्थिति को नियंत्रण में बता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नदी की तेज धाराएं सीधा तटबंधों के निचले हिस्से से टकरा रही हैं, जिससे सुरक्षा बांधों पर भारी दबाव बना हुआ है।
इस स्थिति ने नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण निचले और मैदानी इलाकों में पानी का फैलाव तेजी से हो रहा है। मदरौनी गांव और इसके आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का पानी ग्रामीणों के घरों में प्रवेश कर चुका है। जमीनी हालात का जायजा लेने पर पता चलता है कि लोगों के घरों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं।
ग्रामीण अपने जरूरी सामान और मवेशियों को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। कई परिवारों ने बाढ़ के पानी के बीच ही कमरों के भीतर अस्थायी मचान बना रखे हैं, तो बड़ी संख्या में लोग अपने आशियाने छोड़कर राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं।
तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी फैलने से सबसे बड़ा संकट बुनियादी सुविधाओं का खड़ा हो गया है। अधिकांश ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिससे लोगों के सामने पीने के साफ पानी की भारी किल्लत हो गई है। इसके साथ ही चारों तरफ पानी भर जाने की वजह से मवेशियों के लिए सूखे चारे का गंभीर अभाव हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे हर साल इस प्राकृतिक आपदा की विभीषिका झेलते हैं, लेकिन पानी का लगातार घटना-बढ़ना उनकी मानसिक और आर्थिक चिंता को और गहरा कर देता है। इस्माईलपुर-बिंदटोली, राघोपुर और मदरौनी जैसे संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा बांधों से टकराती नदी की तेज लहरों को देखकर ग्रामीण खौफजदा हैं। पूर्व में हुए बांध कटाव की घटनाओं को याद कर लोग सहमे हुए हैं और किसी भी अनहोनी की आशंका के चलते रात-रात भर जागकर तटबंधों की स्थिति पर खुद नजर रख रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह काबू में है और फ्लड फाइटिंग टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद हैं, लेकिन प्रभावित आबादी अब भी राहत सामग्री और प्रशासनिक मदद की उम्मीद लगाए बैठी है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

