विक्रमशिला सेतु मरम्मत: 4 में से 2 हिस्सों में गर्डर लॉन्चिंग पूरी; इंजीनियरिंग जटिलताओं के कारण 14 जनवरी की डेडलाइन पर संशय
भागलपुर, 05 नवंबर (हि.स.)। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु के जीर्णोद्धार कार्य में तेजी आई है। हालिया प्रगति के अनुसार, सेतु के बेली ब्रिज वाले पुराने स्थान पर दो स्टील ट्रस गर्डर की लॉन्चिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। तकनीकी विभाग और इंजीनियरों की टीम चौबीसों घंटे इस मिशन में जुटी हुई है। हालांकि, कार्य की बेहद जटिल प्रकृति और कड़े तकनीकी मानकों के कारण बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा तय की गई 14 जनवरी की समय सीमा का मिस होना लगभग तय माना जा रहा है। तकनीकी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुल के पुनर्स्थापन की मूल योजना के तहत कुल चार प्रभावित बड़े हिस्सों को दुरुस्त किया जाना है। डिजाइन के मुताबिक इन चारों हिस्सों में दो-दो स्टील गर्डर लगाए जाने हैं, यानी कुल आठ स्टील गर्डर स्थापित होने हैं। वर्तमान में केवल दो जगहों पर ही काम पूरा हो पाया है, जबकि बाकी बचे दो हिस्सों के लिए पुरानी और जर्जर कंक्रीट बीम को काटने का बेहद संवेदनशील काम अभी भी जारी है। गर्डर लॉन्चिंग के बाद लोहे की चदरें बिछाई जाएंगी, फिर सरिया का जाल बांधकर कंक्रीट स्लैब की ढलाई होगी। इंजीनियरों का लक्ष्य 15 दिसंबर तक ढलाई पूरी करने का है। तकनीकी नियमों के मुताबिक, कंक्रीट ढलाई के बाद कम से कम 28 दिनों तक उसकी क्योरिंग की जाती है और उसके बाद ही लोड टेस्ट किया जा सकता है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को तेज नहीं किया जा सकता, जिसके कारण जनवरी के मध्य तक पुल पूरी तरह चालू होना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक और निर्माण टीम पुल पर से पुराने कंक्रीट फुटपाथ और भारी रेलिंग को हटाकर हल्के स्टील के ढांचे फिट कर रही है ताकि पुल का कुल भार कम किया जा सके। बचे हुए दो हिस्सों में अगले कुछ दिनों में नई बेयरिंग सेट करने के बाद बाकी के गर्डर लॉन्च किए जाएंगे। यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बरारी बियाडा घाट से मालवाहक जहाजों शका परिचालन शुरू कराया है, जिससे बड़ी गाड़ियों को पार कराया जा सके और स्थानीय जनता को कम से कम परेशानी हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

