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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में बिहार दिवस समारोह आयोजित

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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में बिहार दिवस समारोह आयोजित


दरभंगा, 23 मार्च (हि.स.)।

बिहार दिवस के अवसर पर सोमवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार की गौरवशाली परंपरा, संस्कृति और बौद्धिक विरासत पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने कहा कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा सदियों से देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रही है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और संस्कार के बल पर राज्य और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

पीआरओ डॉ. निशिकांत ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कांचीपुरम स्थित चन्द्रशेखरेन्द्र विश्वविद्यालय के प्रो. नारायणजी झा ने कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित उपधा चतुष्ट्य—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की गहन व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन-दर्शन के ये चारों आधार स्तंभ समाज और राष्ट्र के संतुलित एवं समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि न्याय, मीमांसा तथा आदि काव्य रामायण जैसे ग्रंथों की रचना में मिथिला के मनीषियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

प्रास्ताविक उद्बोधन में कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने बिहार दिवस को बिहारी अस्मिता का उत्सव बताते हुए कहा कि यह दिन हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और अपनी पहचान पर गर्व करने का अवसर देता है। उन्होंने बिहार की समृद्ध भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष बल दिया।

इस अवसर पर वेद-पुराण संकायाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा ने बिहार की गौरवगाथा का विस्तृत वर्णन किया। समारोह के दौरान बिहार राज्य गीत तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध परंपराओं को जीवंत किया गया।

कार्यक्रम में आगत अतिथियों को पाग, चादर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. पुरेंद्र बारिक ने दिया। कार्यक्रम का संचालन व्याकरण विभाग के प्राध्यापक डॉ. रामसेवक झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस समन्वयक डॉ. सुधीर कुमार ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra