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किशनगंज में बनेंगे दो आर्मी स्टेशन, पूर्वी सुरक्षा तंत्र को मिलेगी नई मजबूती

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किशनगंज में बनेंगे दो आर्मी स्टेशन, पूर्वी सुरक्षा तंत्र को मिलेगी नई मजबूती


किशनगंज, 02 जुलाई (हि.स.)। सीमांचल का किशनगंज जिला जल्द ही देश के पूर्वी सुरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बन सकता है।

भारत-नेपाल सीमा से सटे तथा पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के निकट स्थित इस सामरिक जिले में भारतीय सेना के दो स्थायी आर्मी स्टेशन स्थापित करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है।

प्रशासन ने ठाकुरगंज और कोचाधामन प्रखंड में करीब 400 एकड़ भूमि चिह्नित कर दी है। सेना के अधिकारी प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप 203 एकड़ भूमि सेना स्टेशन के लिए चिह्नित की गई है। वहीं कोचाधामन प्रखंड के सकोर-नटुवापाड़ा क्षेत्र में करीब 200 एकड़ भूमि का चयन किया गया है। हालांकि कोचाधामन में स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

दोनों प्रस्तावों पर प्रशासन और सेना के बीच तकनीकी प्रक्रिया जारी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल किशनगंज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पूर्वी भारत की सुरक्षा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की रणनीतिक मजबूती तथा नेपाल-बांग्लादेश सीमा पर बेहतर सैन्य समन्वय से है।

किशनगंज की भौगोलिक स्थिति इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यहां सेना की स्थायी मौजूदगी से सीमावर्ती गतिविधियों पर निगरानी मजबूत होगी और आपात परिस्थितियों में सैनिकों की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी।

आर्मी स्टेशन को एक आधुनिक सैन्य परिसर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें सैन्य मुख्यालय, सैनिकों के आवास, प्रशिक्षण एवं अभ्यास मैदान, हथियार और गोला-बारूद के सुरक्षित भंडार, हाई-टेक संचार एवं कंट्रोल सेंटर तथा बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही क्षेत्र में सड़क, बिजली और अन्य आधारभूत संरचनाओं का भी विस्तार होने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार ने बताया कि ठाकुरगंज और कोचाधामन में दो आर्मी स्टेशन स्थापित करने की दिशा में पहल की जा रही है। दोनों स्थानों पर भूमि का चयन कर लिया गया है और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है।

रक्षा एवं गृह मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में किशनगंज पूर्वी भारत के प्रमुख सैन्य केंद्रों में शामिल हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह