बहेडवा नदी में अब तक नहीं बना पुल, ग्रामीणों भारी आक्रोश
सुपौल, 26 अप्रैल (हि.स.)। जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र के बहेडवा नदी पर बरसों बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। इसे ग्रामीणों में व्यापक आक्रोश है। प्रखंड के गोनहा - हरिहरपट्टी पंचायत के पश्चिम - पूरब के बीच के इलाके में बहेडवा नदी बहती है। इसके दोनों ओर इन दोनों पंचायतों की सीमा है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात में उन लोगों को पैदल ही नदी पार करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के दोनों छोर पर पक्की सड़क का निर्माण भी कर दिया गया है। वे लोग तीन दशक से पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। कई बार विभागीय स्तर से पुल निर्माण के लिए सर्वे भी किया जा चुका है। लेकिन अब तक इसका निर्माण नहीं हो सका है। पुल निर्माण की मांग को बीते दो विधानसभा चुनाव के दौरान यहां के ग्रामीण वोट बहिष्कार भी कर चुके हैं। बावजूद इसके इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हुई है। यह नदी गोनहा - हरिहरपट्टी पंचायतों को दो भागों में बांटती है। बरसात के दिनों में लोगों को त्रिवेणीगंज प्रखंड, अंचल, अनुमंडल कार्यालय, बैंक और बाजार पांच किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर जाना पड़ता है।
स्थानीय ग्रामीण भूमि मुखिया, छोटू मुखिया, छुतहरु मुखिया, लाल सरदार, लक्ष्मी सरदार, चंद्रदीप मंडल, दुनिया देवी, सियाराम शाह, सुधीर सिंह, आशीष कुमार आदि ने बताया कि बरसात के समय घर तक चार पहिया वाहन ले जाना सपना बना हुआ है। नई दुल्हन को भी घर तक नदी पार कर पैदल हीं ले जाते हैं। कभी-कभी सड़क और पुल के अभाव में शादी ब्याह में गाड़ियों को नदी के किनारे ही लगाना पड़ता है। दूल्हा - दुल्हन को नदी को पैदल पार करना बहुत ही लज्जाजनक स्थिति पैदा कर देती है। इससे सामाजिक विषमता का प्रकोप भी झेलना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में नदी में डूबने से दर्जनों लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन की ओर से पहल नहीं होने से अब इस इलाके के लोग हताश हो चुके हैं। पुल नहीं होने के कारण बाजितपुर, पुरन्दाहा, लहरनिया, भगवानपुर, कुशहा, कर्णपट्टी, ओरलाहा, मिरजावा की 15-20 से अधिक की आबादी को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं, कोई तरह के वादे और आश्वासन देते हैं, लेकिन जीतने के बाद क्षेत्र की समस्या को ही भूल जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के समय जब नदी उफ़ान पर होती है, तब नदी पार करना हमेशा जोखिम भरा रहता है। कई बार ग्रामीण जनप्रतिनिधियों अधिकारियों से पुल निर्माण को लेकर गुहार लगाकर थक चुके हैं, लेकिन हर बार उनकी बात अनसुनी की जाती रही है। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि सरकार कहती है कि उनके प्राथमिकता में पुल निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में एक है। लेकिन हर बार यहां के ग्रामीण अपने को ठगा महसूस करते हैं। अब वेवश ग्रामीणों ने आंदोलन का मन बना लिया है। यदि जल्द ही निर्माण को लेकर कार्रवाई नहीं होगी तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य हो जाएंगे।
रविवार को ग्रामीणों ने नदी किनारे इकट्ठा होकर पुल निर्माण की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

