नव वर्ष पर महर्षि संत सेवी ध्यान योग आश्रम में संस्कृति बचाओ सत्संग कार्यक्रम
नवादा, 19 मार्च (हि.स.)। प्रकृति की गोद में अवस्थित पूज्यपाद स्वामी नित्यानंद जी महाराज की साधना स्थली महर्षि संतसेवी ध्यानयोग आश्रम धनावां में सनातन हिन्दू नववर्ष के मौके पर गुरुवार को आश्रम संचालक स्वामी शांतानंद जी महाराज के सानिध्य में विशेष सत्संग -भजन का आयोजन किया गया।
सामुहिक ईश्वर स्तुति गुरु विनती,वेद उपनिषद सद्ग्रंथ का पाठ किया गया। सर्व प्रथम स्वामी शांतानंद जी महाराज ने सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की आदमकद तस्वीर पर पुष्पांजली किया। सनातन हिन्दू नववर्ष की महत्ता बतलाते हुए स्वामी शांतानंद जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति सनातन धर्म में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को संवत्सर संवत् अर्थात सनातन हिन्दू नववर्ष माना जाता है।
ब्रह्म पुराण के मान्यता के अनुसार सृष्टि कर्ता भगवान ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।यह दिन सत्ययुग का प्रारंभ और चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता दुर्गा ने महिषासुर को वध करने के लिए अवतार लिया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार लंका पर विजय प्राप्त करके और 14वर्षों का वनवास काटने के बाद भगवान श्री राम जब अयोध्या लौटे तो उनके राज्याभिषेक का दिन भी चैत्र प्रतिपदा ही था। पौराणिक कथाओं के अनुसार उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन शकों को हराकर भरतखण्ड को मुक्त कराया था। वे सनातन हिन्दू नववर्ष यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही विक्रमादित्य चक्रवर्ती सम्राट बन कर विक्रम संवत प्रारंभ किया जो आज भी हिन्दू कलेंडर का आधार है।इस तरह विक्रम संवत 2083 का नव वर्ष मंगलमय का क्षण हर सनातनी के लिए गौरवान्वित करने का क्षण है।
नव वर्ष मंगलमय क्षणों में बसंत ऋतु का आगमन होता है प्रकृति में नयी ऊर्जा लाती है फसलें पककर तैयार होती है इस दिन नीम के कोंपलें और गुड़ खाने की परंपरा है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से हमें संक्रमण से बचने का उत्तम उपाय माना जाता है। इस मौके पर सिपाही बाबा, अभिजीत शर्मा, सोनू आदि मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सुमन

