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राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

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राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा विधिक जागरूकता शिविर आयोजित


नालंदा, बिहारशरीफ 11 जनवरी (हि.स.)।नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड अंतर्गत खुदागंज थाना क्षेत्र के वैरा गॉव स्थित वैरा समुदायिक भवन में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार पटना के निर्देशन में नालन्दा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह जिला जज गुरुविन्दर सिंह महलहोत्रा व सचिव राजेश कुमार गौरव तथा अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति हिलसा के अध्यक्ष सह एडीजे आलोक कुमार पाण्डेय व सचिव सह एसडीजेएम शोभना स्वेतांकी के संयुक्त आदेश पर पैनल अधिवक्ता विजय कुमार एवं हिलसा विधिक सहायता केन्द्र व खुदागंज थाना में प्रतिनियुक्त पीएलवी आलोक कुमार के कुशल नेतृत्व में आज रविवार को बिहार पीड़ित मुआवजा विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। सर्व प्रथम पीएलवी आलोक कुमार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के गठन व उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राधिकार द्वारा निः शुल्क विधिक सहायता सुविधाएँ दी जा रही है जिसमें लोग अपनी समस्या को लेकर जा सकते हैं

पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने कहा कि बिहार पीड़ित मुआवजा योजना एक सरकारी योजना है यह योजना वर्ष 2009 में बनायी गयी थी जो अपराधों के पीड़ितों आश्रितों को आर्थिक सहायता देती है ताकि उनकी चोट विकलांगता , मृत्यु या अन्य नुकसान की भरपाई की जा सके यह योजना सीआरपीसी की धारा 357A के तहत बनायी गयी है। एसिड अटैक या बलात्कार जैसी वारदातों की शिकार महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने के लिए उन्हें सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में क्रिमिनल इंज्यूरी कंपेन्शेसन बोर्ड का गठन किया गया है।यह योजना बिहार के सभी जिले में लागू है।लोगों के मूल अधिकारों की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है। कानूनी तौर पर सरकार नैतिक और सामाजिक आधार पर पीड़ित की रक्षा करने और उनका पुर्नवास करने को वाध्य है। वहींएसिड अटैक और रेप जैसे अत्याचार की शिकार महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा पहले 3 लाख की आर्थिक मदद पहुँचायी जाती थी जिसे वर्ष 2018 -19 के संशोधन में इस राशि को बढ़ा कर 3 से 7 लाख रुपया तक कर दिया गया है।यदि किसी पीड़िता का एसिड अटैक की वजह से 80% से अधिक चेहरा खराब हुआ है तो उसे आजीवन दस हजार रुपये की आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई जाती है।

लाभार्थी को दी जाने वाली आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में पहुँचायी जाती है। वहींइलाज में आने वाले खर्च को मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से दिया जाता है। इलाज में आने वाले खर्च की राशि सीधे अस्पताल में ट्रांसफर करने का प्रावधान है। आवेदन राज्य विधिक सेवा प्राधिकार या जिला विधिक सेवा प्राधिकार में दिया जा सकता है। थानाध्यक्ष भी पीड़िता के तरफ से मुआवजा के लिए डीएलएसए एस एल एस ए एस डी एल एस सी को आवेदन देकर मुआवजा दिला सकते हैं।वांछित दस्तावेज एफ आई आर की कॉपी , मेडिकल रिपोर्ट, पहचानपत्र, बैंक खाता, (मृत्यु प्रमाण पत्र ), शपथपत्र , आश्रित प्रमाण पत्र , दो फोटो इत्यादि देना अनिवार्य है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे