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125 साल की हुई लाइन बूढ़ी काली मंदिर की आस्था, 2054 तक प्रतिमा भेंट करने की बुकिंग पूरी

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125 साल की हुई लाइन बूढ़ी काली मंदिर की आस्था, 2054 तक प्रतिमा भेंट करने की बुकिंग पूरी


किशनगंज, 07 नवंबर (हि.स.)। आस्था, विश्वास और प्राचीन लोक परंपरा का अनूठा संगम किशनगंज शहर के लाइन मोहल्ला स्थित ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर इस वर्ष अपनी स्थापना के 125 वर्ष पूरे करने जा रहा है।

वर्ष 1902 में स्थापित यह मंदिर सवा सौ वर्षों से सीमांचल के श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक 125वीं वर्षगांठ और आगामी 8 नवंबर को होने वाली वार्षिक काली पूजा को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा और भव्य तोरण द्वारों से सजाया जा रहा है। मंदिर का इतिहास भी इसकी धार्मिक परंपरा जितना ही खास है।

स्थापना के बाद समय के साथ मंदिर परिसर का विस्तार हुआ और यहां भव्य शिव मंदिर की भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। खास बात यह है कि स्थापना काल से ही एक ही पुजारी परिवार की पीढ़ियां मां काली की पूजा-अर्चना कराती आ रही हैं। वर्तमान में मुख्य पुजारी मलय मुखर्जी अपने पूर्वजों की परंपरा को वैदिक विधान के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

मंदिर की एक अनूठी परंपरा के तहत वार्षिक काली पूजा से ठीक एक दिन पहले पिछले वर्ष स्थापित प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। इसके बाद नई प्रतिमा स्थापित कर पूजनोत्सव की शुरुआत होती है।

125वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए पूजा कमेटी के सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं। मंदिर और आसपास के रास्तों पर आकर्षक रोशनी, सजावट और तोरण द्वार बनाए जा रहे हैं। हजारों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए कतारबद्ध दर्शन और सुरक्षा की व्यवस्था की जा रही है।

आयोजन को सफल बनाने में भजन चंद्र पॉल, अमित कुमार दास, मनोज मजुमदार, साधन दास, सुभजीत शेखर, बिक्की दास, देवराज दास, निखिल पाल, सुदीप्ता दास, गौतम मजुमदार, कुशल दास, दीपांकर, दीपक कुमार, विशाल, जीत सरकार, अनिर्बान दास, अजिताभ राही, प्रीतम पाल और कल्याण बोस सहित स्थानीय युवा व प्रबुद्धजन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह