मारवाड़ी महाविद्यालय में आयोजित हुआ विद्यार्थी सहयोग शिविर
भागलपुर, 25 अगस्त (हि.स.)। भागलपुर के मारवाड़ी महाविद्यालय में मंगलवार को विद्यार्थी सहयोग शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में जिलाधिकारी अलंकृता पांडे, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव एवं नगर पुलिस अधीक्षक, भागलपुर की उपस्थिति में विद्यार्थियों से संवाद किया गया तथा उनकी शैक्षणिक, परीक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति, संस्थान से संबंधित समस्याओं एवं अन्य शिकायतों की जानकारी ली गई।
इस दौरान विद्यार्थियों द्वारा रखी गई समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुना गया। संबंधित पदाधिकारियों को विद्यार्थियों की समस्याओं का समयबद्ध, प्राथमिकता के आधार पर एवं प्रभावी तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर डीएम ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा उन्हें अपनी शिकायतों एवं समस्याओं को रखने के लिए सुगम मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक माह के चतुर्थ मंगलवार को विद्यार्थी सहयोग शिविर आयोजित किया जाना निर्धारित है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान एवं उनके हितों की सुरक्षा जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। डीएम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संचार एवं सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं की उपलब्धता अत्यधिक बढ़ गई है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह समझना आवश्यक है कि कौन-सी सूचना उनके लिए उपयोगी है, किससे वे प्रभावित होंगे तथा किस सूचना को स्वीकार या अस्वीकार करना है।
उन्होंने कहा कि आज एक ही विषय से संबंधित जानकारी विभिन्न शिक्षण प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन माध्यमों, एप एवं अन्य स्रोतों से उपलब्ध हो रही है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को सही जानकारी का चयन करने तथा उसे आत्मसात करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि 18 वर्ष की आयु के बाद उन्हें अनेक अधिकार एवं स्वतंत्रताएं प्राप्त होती हैं। देश की सरकार चुनने का अधिकार मिलने के साथ-साथ उन्हें अपने जीवन के लिए सही निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की समझ एक दिन में विकसित नहीं होती, बल्कि यह अनुभव से आती है। जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों को अपनी गलतियों से सीखने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों के अनुभवों और गलतियों से भी सीखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षकों, माता-पिता, बड़े भाई-बहनों एवं आसपास के लोगों के अनुभवों को समझकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। दूसरों के अनुभवों से सीखने की प्रवृत्ति व्यक्ति के सीखने और स्वयं में सुधार करने की गति को और बेहतर बनाती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने आसपास की परिस्थितियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। विशेष रूप से सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में नकारात्मकता से स्वयं को बचाना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा करने वाले लोगों की संख्या कम और कमियां निकालने अथवा आलोचना करने वाले लोगों की संख्या अधिक हो सकती है। ऐसे में विद्यार्थियों को नकारात्मक टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने, सही निर्णय लेने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा अपने अनुभवों के साथ-साथ दूसरों के अनुभवों से सीखने के लिए प्रेरित किया।
शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं एवं सुझावों को प्रशासन के समक्ष सीधे रखने का अवसर मिला। जिला प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित विभागों एवं पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

