अंतरिक्ष आधारित तकनीक और नवाचारों से बिहार के विकास को मिलेगी नई गति : सम्राट चौधरी
पटना, 29 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, पटना में आयोजित 'स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026' में अंतरिक्ष आधारित तकनीक, आधुनिक वैज्ञानिक समाधानों और नवाचारों को बिहार के विकास एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ने पर बल दिया।
मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज के युग में तकनीकी विकास के बिना प्रगति की कल्पना नहीं की जा सकती। आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प तथा समृद्ध बिहार के लक्ष्य को साकार करने के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार को प्राथमिकता देना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान, शिक्षा और प्रबुद्धता की भूमि रही है। आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य जैसी महान विभूतियों की विरासत बिहार की बौद्धिक परंपरा का प्रमाण है। इस गौरवशाली विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक सोच और तकनीकी क्षमता के साथ जोड़कर राज्य को विकास के नए आयाम तक पहुंचाया जा सकता है।
सम्राट चौधरी ने अधिकारियों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे बिहार की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक और उपयोगी एप्लीकेशन विकसित करें। ऐसे समाधानों को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित न रखते हुए धरातल पर लागू किया जाएगा, ताकि उनका वास्तविक लाभ आम जनता, किसानों और प्रशासनिक व्यवस्था को मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की चुनौतियों को अवसर में बदलना समय की आवश्यकता है। नेपाल तथा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर से आनेवाले जल प्रवाह के कारण राज्य के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, राज्य की विशाल जनसंख्या भी बेहतर संसाधन प्रबंधन और प्रभावी सार्वजनिक सेवाओं की मांग करती है। अंतरिक्ष आधारित तकनीक, रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग बाढ़ की निगरानी, जल प्रबंधन, कृषि नियोजन और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने बिहार के लिए नदियों के जल के समुचित उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य को विशेष रूप से गंगा नदी के जल का वर्षभर पेयजल और सिंचाई जैसे आवश्यक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की दिशा में प्रभावी पहल की आवश्यकता है, इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन, बेहतर योजना और संबंधित राज्यों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों और तकनीकी संस्थानों से नए नवाचारों को अपनाने, आपसी सहयोग बढ़ाने तथा तकनीकी समाधानों को जनहित से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाना तथा बिहार के विकास को नई गति प्रदान करना है।
इससे पहले 'इम्पावरिंग गवर्नेंस: लिवरेजिंग स्पेस इनेबल्ड सॉल्यूशंस फॉर प्रोग्रेसिव बिहार'' कार्यक्रम की शुरूआत में मुख्यमंत्री ने इस दो दिवसीय 'स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026' में आये हुये विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा लगाये गये प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नये एप्लिकेशन के बारे में तथा उनकी उपयोगिता को लेकर उनसे विस्तृत जानकारी ली।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 'टेककनेक्ट' पोर्टल का शुभारंभ किया। साथ ही, बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इन पहलों का उद्देश्य तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना तथा अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

