सात समंदर पार चमकेगी भागलपुर की पहचान, अमेरिका में मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप से होगी छठ पूजा
भागलपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)।भागलपुर की सदियों पुरानी पारंपरिक मंजूषा कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अनूठी पहचान बनाने जा रही है। लोक आस्था के महापर्व छठ से ठीक पहले, अमेरिका से मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप का विशेष ऑर्डर मिलने से स्थानीय कलाकारों में भारी उत्साह है।
यह पहला मौका है जब अंग प्रदेश की यह प्रसिद्ध लोककला देश की सीमाओं को लांघकर सीधे अमेरिका के छठ घाटों तक पहुंचेगी।
छठ महापर्व में सूप का विशेष धार्मिक महत्व होता है, जिसमें व्रती फल, ठेकुआ और अन्य पूजन सामग्री रखकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं। इस बार अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय अपनी पूजा में भागलपुर के विशेष मंजूषा पेंटिंग वाले सूप का इस्तेमाल करेंगे।
पारंपरिक बांस के सूप पर उकेरी गई मंजूषा कलाकृतियां न केवल इसकी खूबसूरती बढ़ा रही हैं, बल्कि यह आस्था और बिहार की सांस्कृतिक विरासत का एक अद्भुत संगम भी पेश कर रही हैं। इस खास अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर को समय पर और बेहद कलात्मक ढंग से पूरा करने के लिए मंजूषा गुरु मनोज पंडित और उनकी टीम दिन-रात तैयारी में जुटी हुई है। कलाकारों द्वारा सूप को सजाने में मंजूषा कला की पारंपरिक बारीकियों, विशेष रेखाचित्रों और प्राकृतिक रंगों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि, अमेरिका से मिले कुल ऑर्डर की संख्या, इसकी कीमत और डिलीवरी के सटीक स्थान की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इस पहल ने स्थानीय हस्तशिल्पियों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भागलपुर की मंजूषा कला अपनी विशिष्ट चित्रांकन शैली और मुख्य रूप से तीन रंगों (गुलाबी, हरा और पीला) के प्रयोग के लिए जानी जाती है। इससे पहले भी इस कला से सजे सूप देश के विभिन्न राज्यों में भेजे जाते रहे हैं। लेकिन, अमेरिका से मिले इस ऑर्डर ने इसे वैश्विक बाजार में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा दिया है। विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए मंजूषा कला से सजे ये सूप न केवल उनकी पूजा को खास बनाएंगे, बल्कि उन्हें अपनी मातृभूमि की मिट्टी और संस्कृति से भी गहराई से जोड़े रखेंगे। मंजूषा कला का यह बढ़ता दायरा पूरे भागलपुर और बिहार के लिए गौरव का विषय है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

