home page

सोन बेसिन में जल उपलब्धता के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू, राज्यों से मांगे गए आंकड़े

 | 
सोन बेसिन में जल उपलब्धता के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू, राज्यों से मांगे गए आंकड़े


डेहरी आन सोन, 28 अक्टूबर (हि.स.)।

सोन नदी बेसिन में अतिरिक्त जल की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने बेसिन से जुड़े राज्यों से प्रमुख जल परियोजनाओं के दीर्घकालिक आंकड़े मांगे हैं।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा के पत्र के जवाब में यह जानकारी दी है। वहीं, आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने के कारण जमानिया पंप नहर योजना के प्रस्ताव को राज्य सरकार को वापस माना गया है।

सांसद उपेंद्र कुशवाहा के अनुसार गत 26 अगस्त को केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर वर्ष 1973 के बाणसागर एकरारनामा के तहत सोन बेसिन में उपलब्ध अतिरिक्त जल का आकलन करने और राज्यों के बीच जल का पुनर्निर्धारण कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने जमानिया पंप नहर योजना को केंद्रीय जल आयोग से अंतिम स्वीकृति दिलाने का मुद्दा भी उठाया था।

# राज्यों की सहमति के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया

केंद्रीय मंत्री के पत्र के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी चोपन स्थल पर पूर्व में किए गए जल विज्ञान संबंधी प्रेक्षणों के आधार पर सोन बेसिन में अतिरिक्त जल उपलब्ध होने की संभावना जताई थी। राज्य सरकार ने इसके पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी।

इस मामले में आठ मई 2026 को केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। बैठक में सोन नदी बेसिन से जुड़े सभी राज्यों ने जल उपलब्धता के पुनर्मूल्यांकन के लिए सैद्धांतिक सहमति दी थी। इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गत 12 अगस्त को मुख्य अभियंता (हाइड्रोलॉजी) की अध्यक्षता में एक और बैठक आयोजित की गई।

इंद्रपुरी बराज समेत प्रमुख परियोजनाओं के आंकड़े तलब

पुनर्मूल्यांकन के लिए राज्यों से इंद्रपुरी बराज , रिहंद बांध, बाणसागर बांध और ओबरा बांध जैसी प्रमुख परियोजनाओं के संचालन शुरू होने की तिथि से अब तक के अंतर्वाह (इनफ्लो), अतिरिक्त जल के बहाव (स्पिल) और जल उपयोग से संबंधित दीर्घकालिक आंकड़े मांगे गए हैं। इन आंकड़ों को 10-दिवसीय श्रृंखला प्रारूप में उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा भविष्य में प्रस्तावित जल परियोजनाओं का विवरण भी मांगा गया है।

सांसद कुशवाहा ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्यों से आवश्यक आंकड़े प्राप्त होने के बाद ही सोन बेसिन में जल उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन पूरा हो सकेगा। इसके बाद संबंधित राज्यों की सहमति से अतिरिक्त जल के पुनर्निर्धारण की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

जानकारी के अभाव में जमानिया पंप नहर योजना को झटका

जमानिया से ककरैत गंगाजल लिफ्ट सिंचाई योजना से संबंधित जमानिया पंप नहर परियोजना के मामले में केंद्रीय जल आयोग को अपेक्षित सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। मंत्री के अनुसार, आयोग की ओर से कई बार अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद आवश्यक जानकारी नहीं मिली। इस कारण प्रस्ताव को राज्य सरकार को वापस किया हुआ मान लिया गया है। साथ ही, इसे केंद्रीय जल आयोग के परीक्षणाधीन प्रस्तावों की सूची से भी हटा दिया गया है। ऐसे में परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक जानकारी और आगे की प्रक्रिया की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

सोन नदी बेसिन में जल उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन पूरा होने के बाद विभिन्न राज्यों के बीच जल के बंटवारे से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसके लिए आंकड़ों का संकलन, तकनीकी आकलन और संबंधित राज्यों के बीच सहमति आवश्यक होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र मिश्रा