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स्मार्ट व्यवस्था की बदहाली, भागलपुर में 3.41 करोड़ के ई-टॉयलेट बना कबाड़, जनता को नहीं मिल रहा लाभ

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स्मार्ट व्यवस्था की बदहाली, भागलपुर में 3.41 करोड़ के ई-टॉयलेट बना कबाड़, जनता को नहीं मिल रहा लाभ


भागलपुर, 02 अगस्त (हि.स.)।

भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों की हवा शहर के आधुनिक ई-टॉयलेट दे रहे हैं।

आम जनता और राहगीरों को हाईटेक सुविधा देने के नाम पर भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा शहर में कुल 25 ई-टॉयलेट का निर्माण कराया गया था। लेकिन करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बाद भी आज स्थिति यह है कि धरातल पर योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है। रख-रखाव के अभाव में ये हाईटेक शौचालय अब सिर्फ 'शोभा की वस्तु' और कबाड़खाने में तब्दील हो चुके हैं।

जांच रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 3.41 करोड़ रुपये थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम सर्वश्री रिलायबल एंटरप्राइजेज नामक एजेंसी को सौंपा गया था, जो हाल ही में बड़े टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में घिर चुकी है। अनुबंध के मुताबिक, संबंधित एजेंसी को इन ई-शौचालयों को स्थापित करने के साथ-साथ 5 वर्षों तक इनका संचालन और रख-रखाव करना था। हालांकि, निर्माण पूरा होने के बाद एजेंसी अपने दायित्वों से पूरी तरह मुकर गई।

नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन द्वारा बार-बार बुलाई गईं समीक्षा बैठकों और नोटिसों के बावजूद एजेंसी का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ, जिससे पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई। उल्लेखनीय है कि शहर के प्रमुख और अधिक भीड़भाड़ वाले 12 रणनीतिक स्थानों को चिह्नित कर इन 25 यूनिट्स को लगाया गया था। इनमें मुख्य रूप से सैंडिस कंपाउंड मैदान, लाजपत पार्क, शहर का मुख्य बस डिपो क्षेत्र तथा अन्य प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक चौराहे शामिल हैं।

इन ई-टॉयलेट में ऑटोमैटिक डोर सिस्टम, सेंसर-आधारित फ्लशिंग और क्लीनिंग, स्मार्ट वाटर मीटर जैसी आधुनिक तकनीकें लगाई जानी थीं, ताकि सफाई कर्मचारियों पर निर्भरता कम हो। मगर जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश जगहों पर पानी और बिजली के कनेक्शन तक सुचारू नहीं हैं। कई शौचालयों के दरवाजे और कीमती उपकरण या तो चोरी हो चुके हैं या टूट चुके हैं। आम लोगों का कहना है कि जहां एक तरफ सरकार स्वच्छता अभियान पर जोर दे रही है, वहीं भागलपुर में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद किया जा रहा है।

इस भारी विफलता के बाद अब नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन के बीच इन शौचालयों को फिर से चालू करने की रस्साकशी चल रही है। हाल ही में इन्हें पुनर्जीवित करने और किसी नई एजेंसी के माध्यम से चालू कराने की कवायद शुरू की गई है, लेकिन शहरवासियों को इस दावों पर अब भरोसा नहीं रहा। देखना यह होगा कि क्या भागलपुर की जनता को कभी इन करोड़ों के ई-टॉयलेट का लाभ मिल पाएगा या यह योजना पूरी तरह फाइलों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर