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बाल हृदय योजना के तहत छह बच्चे पटना रेफर, जन्मजात हृदय रोग का होगा निःशुल्क इलाज

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बाल हृदय योजना के तहत छह बच्चे पटना रेफर, जन्मजात हृदय रोग का होगा निःशुल्क इलाज


किशनगंज, 02 अगस्त (हि.स.)। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित छह बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए रविवार को सदर अस्पताल किशनगंज से तीन एंबुलेंस के माध्यम से पटना स्थित जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया। वहां आयोजित विशेष जांच शिविर में बाल हृदय रोग विशेषज्ञ बच्चों की विस्तृत जांच करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क ऑपरेशन और अन्य उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि रेफर किए गए बच्चों में बहादुरगंज की बिद्या कुमारी (2 वर्ष 6 माह) और आराध्या कुमारी (7 माह), ठाकुरगंज के राजेंद्र कुमार राजभर (17 वर्ष), टेढ़ागाछ के श्रेयांश कुमार मांझी (4 माह), पोठिया के सोहन हरिजन (2 वर्ष) तथा किशनगंज प्रखंड के अनाश राजा (8 वर्ष) शामिल हैं।सभी बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित पटना रवाना किया गया।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि बाल हृदय योजना के तहत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को विशेषज्ञ अस्पतालों में निःशुल्क जांच, ऑपरेशन, दवा, भर्ती, परिवहन और उपचार के बाद फॉलो-अप की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक एक हजार नवजात शिशुओं में लगभग आठ से दस बच्चे इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। समय पर पहचान और उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य जांच कर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान करती हैं। पात्र बच्चों को बाल हृदय योजना के तहत सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में रेफर किया जाता है।

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2021 से अगस्त 2026 तक जिले के 47 बच्चों को इस योजना के तहत निःशुल्क उपचार के लिए विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में भेजा जा चुका है। वर्ष 2025 में सर्वाधिक 16 बच्चों को योजना का लाभ मिला, जबकि वर्ष 2026 में अब तक छह बच्चों को रेफर किया गया है।

जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के उपचार में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को स्क्रीनिंग अभियान और प्रभावी बनाने का निर्देश देते हुए कहा कि समय पर पहचान और इलाज से बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह