सरकार के दावों के बीच दरौली की ऐतिहासिक धरोहर जर्जर, विदेशी भिक्षुओं ने दिखाया आईना
सीवान, 03 मार्च (हि.स.)।बिहार में सीवान जिले के दरौली खंड क्षेत्र में विदेशी बौद्ध शोधकर्ताओं और भिक्षुओं के आगमन के बारे में ऐतिहासिक अमरपुर केवटलिया गांव में एक बार फिर चर्चा हुई है।
मंगलवार की सुबह लगभग 6 बजे दक्षिण और पूर्वी तट पर भ्रमण स्थल लगभग 11 बजे तक वहां विदेशी साधना एवं अनुशीलन करने के बाद वापस लौट आए। लगभग 2200 वर्ष प्राचीन मणि जा रही है इस विरासत के संरक्षण की मांग के बाद उनका दौरा और तेजी से हो गया है।
मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर पश्चिम अमरपुर केवटलिया गांव में सरयू नदी के दक्षिणी तट पर स्थित यह प्राचीन इमारत अपनी प्राचीनता का संकेत है।
स्थानीय लोगों एवं शोधार्थियों के अनुसार इमारतों में संयुक्त समूह मौर्य, कुषाण एवं गुप्तकालीन विशिष्ट हैं। इसके बावजूद यह खनिज पदार्थ राज्य स्तर पर सुरक्षा की गारंटी कर रही है।
वियतनाम से आए भिक्षु बोधिचिता माता एवं धम्म चिता सहित अन्य शोधार्थियों ने स्थल पर गहनता साधना की। उन्होंने इमारत का सूक्ष्म अंश और परीक्षण एवं पूजन के उद्देश्य से एक संयोजन अपने साथ ले लिया।
स्थापत्य में प्राचीनता के संकेत
शोधार्थी सह भंते डॉ अशोक शाक्य ने बताया कि इमारत के अंदर कमल पुष्प, चक्र और देवी-देवताओं का तख्त आज भी स्थापित है, जो इसकी ऐतिहासिकता का वर्णन करता है। यहां कुलकुल देवी की पूजा स्थानीय सनातन परंपरा का हिस्सा है।
ऐतिहासिक सन्दर्भ
शोधकर्ता विशाल भंते ने बताया कि प्राचीन काल में यह क्षेत्र मल्ल गणराज्य के अधीन था और संभावित मल्लिक राजवंश द्वारा इस बौद्ध विहार का निर्माण किया गया था।
शोधार्थी डॉ कृष्ण कुमार सिंह ने चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांत का उल्लेख करते हुए 'बैड' ग्रामों का संदर्भ दिया और क्षेत्र में बौद्ध प्रभाव के ऐतिहासिक साक्ष्यों की चर्चा की।
संरक्षण की मांग
के अनुसार, इस स्थल पर प्राचीन बौद्ध विहार होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस स्थान का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर इसे संरक्षित संरक्षित स्थल घोषित किया जाए, ताकि आने वाली जगह पर इस ऐतिहासिक स्मारक को सुरक्षित रखा जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

