जश्ने ईद मिलादुन्नबी पर निकला जुलूसे मोहम्मदी, अकीदत में डूबा सीवान
सीवान, 26 अगस्त (हि.स.)। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को शहर में जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। बारह रबीउल अव्वल के मौके पर आयोजित जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान शहर का माहौल अकीदत और उत्साह से सराबोर रहा। जुलूस के स्वागत के लिए निर्धारित मार्ग पर जगह-जगह आकर्षक फूल-पत्तियों से तोरण द्वार बनाए गए थे। मस्जिदों, गली-मोहल्लों को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया था। जुलूस के दौरान कई स्थानों पर फूलों की बारिश की गई, जबकि विभिन्न जगहों पर स्टॉल लगाकर लोगों के बीच शरबत, पानी, केक, बिस्कुट, फल, ठंडा पेय और चॉकलेट आदि का वितरण किया गया।
बुधवार की सुबह शहर के विभिन्न मोहल्लों से जुलूसे मोहम्मदी निकला और पुराना किला मैदान में एकत्रित हुआ। यहां से सुबह करीब नौ बजे विशाल जुलूस निर्धारित मार्ग से रवाना हुआ। जुलूस पुराना किला से बबुनिया रोड, सराय मोड़, तेलहट्टा बाजार, बड़ी मस्जिद के पीछे से कागजी मोहल्ला, शास्त्री नगर, जेपी चौक, दरबार मस्जिद, थाना रोड होते हुए हाफिजी चौक के रास्ते शेख मोहल्ला स्थित ग्यारहवीं शरीफ मस्जिद पहुंचा। वहां दरूदो सलाम और फातेहाखानी के बाद जुलूस का समापन हुआ।
ग्यारहवीं शरीफ मस्जिद के समीप बनाए गए मंच पर मौलाना अब्दुल मुस्तफा गौसी, मुफ्ती इरफान चिश्ती, सैयद माज आरफी, मो. इकबाल, मकसूद रंगरेज, मो. मेराज, मो. चांद, मौलाना अशफाक, जाहिद सिवानी, मुस्तफा, नदीम सिवानी, हाफिज मंजर खान, हाफिज अरमान, जैन इमाम हैदरी, सलीम सिद्दीकी पिंकी, गुड्डू भाई, इंतखाब अहमद, इरशाद अहमद खान, मुफ्ती मेहराबुल कादरी, मौलाना सद्दाम हुसैन, हाफिज मुनीर रजा, राजन सर, सोना बाबू, मो. आरिफ, बशरे आलम, धनु और मो. तस्लीम सहित अन्य लोग मौजूद रहे। जुलूसे मोहम्मदी को लेकर शहर के निर्धारित मार्गों, मोहल्लों और प्रमुख चौक-चौराहों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। नगर थाना पुलिस के साथ ट्रैफिक पुलिस और महिला पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ग्यारहवीं शरीफ मस्जिद के आसपास भी पर्याप्त संख्या में पुलिस बल लगाया गया था, ताकि जुलूस के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था सुचारू बनी रहे। ग्यारहवीं शरीफ मस्जिद में ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर हजरत मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम और अन्य बुजुर्गों से जुड़ी निशानियों की जियारत भी कराई गई। मस्जिद के व्यवस्थापक एवं राजा इस्माईल अली खान के पोते मोइनुद्दीन खान उर्फ मोईन बाबू ने बताया कि उनके अनुसार सीवान की ग्यारहवीं शरीफ मस्जिद में हजरत मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम और अन्य बुजुर्गों से जुड़ी अनेक निशानियां सुरक्षित रखी गई हैं।
प्रत्येक वर्ष इस अवसर पर इन निशानियों की जियारत कराई जाती है, जिसे देखने के लिए जिले के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। जियारत के दौरान मस्जिद में पैगंबर मोहम्मद साहब का मुवे मुबारक (दाढ़ी का बाल), पत्थर पर दो पैरों के निशान, हजरत अली सल. के हाथ के पंजे और पैर के निशान, हजरत फातमा जहरा के चादर का टुकड़ा, हजरत इमाम हुसैन अलै. के हाथ से लिखा कुरआन शरीफ, बड़े पीर साहब के पैर का निशान, गौसे पाक का जानमाज, जिस पर उनके नमाज पढ़ने की बात कही जाती है, तवायमुम की मिट्टी तथा हजरत इस्माईल अलै. के हाथों से कुर्बानी किए गए दुम्बे के चमड़े की जियारत लोगों ने की। देर शाम तक जियारत के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। इनमें महिलाओं की संख्या भी काफी रही।
इस अवसर पर ग्यारहवीं शरीफ मस्जिद के व्यवस्थापक मोइनुद्दीन खान उर्फ मोईन बाबू, डॉक्टर शारिक नैयर, मो. तारिक, मो. नेहाल, अब्दुल कलीम, नियाज अहमद, जावेद अशरफ खान, शमशाद अली, मैनुद्दीन हसन, राजा, अरमान, सैयद ओबैदुर रहमान, कुतुबुद्दीन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

