अनोखी आस्था: दो माह की बेटी को डोली में लिटाकर दंडवत यात्रा पर निकला पिता
भागलपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। श्रावणी मेले में बाबा भोलेनाथ के प्रति भक्तों की अगाध श्रद्धा के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार कच्ची कांवरिया पथ पर आस्था का एक ऐसा अनोखा रूप सामने आया है जिसे देखकर हर कोई दंग है। मुजफ्फरपुर के रहने वाले मिथिलेश कुमार अपनी महज दो महीने की नवजात बेटी को डोली में बैठाकर दंडवत (लेटकर) यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं।
पिता का बेटी के प्रति यह अनूठा प्रेम और भगवान के प्रति अटूट विश्वास इस समय कांवरिया पथ पर चलने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।
श्रद्धालु मिथिलेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार में पहले से एक बेटा है, लेकिन उन्हें एक बेटी की कमी हमेशा खलती थी। पिछले वर्ष जब वह बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करने आए थे, तब उन्होंने भोलेनाथ से घर में बेटी के जन्म की मन्नत मांगी थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो वह दंडवत यात्रा करते हुए अपनी लाडली को बाबा के दरबार लेकर जाएंगे। इस वर्ष बाबा ने उनकी पुकार सुन ली।
संकल्प के मुताबिक, वह सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर के लिए निकल पड़े हैं। अपनी दो महीने की मासूम बेटी को यात्रा के दौरान कोई परेशानी न हो, इसके लिए मिथिलेश ने खास इंतजाम किए हैं। उन्होंने एक विशेष डोली तैयार करवाई है। इस डोली में बच्ची की सुविधा के लिए छोटा पंखा, लाइट और इन सब को चलाने के लिए सोलर पैनल की व्यवस्था की गई है। इस कड़कती धूप और उमस भरे मौसम में भी बच्ची डोली के अंदर पूरी तरह सुरक्षित और आराम से है।
कच्ची कांवरिया पथ से गुजरने वाले शिवभक्त इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए रुक रहे हैं। लोग न सिर्फ पिता की इस कठिन साधना को नमन कर रहे हैं, बल्कि बेटी के प्रति उनके इस असीम प्रेम की सराहना भी कर रहे हैं।
मिथिलेश कुमार की यह यात्रा केवल एक धार्मिक संकल्प नहीं है, बल्कि आज के समाज में बेटियों के सम्मान, उनके अधिकार और उनके महत्व को बढ़ावा देने का एक बेहद खूबसूरत और सकारात्मक संदेश भी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

