home page

शिक्षा सेवकों ने सांसद से सेवा स्थायी करने और राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए पहल की मांग की

 | 
शिक्षा सेवकों ने सांसद से सेवा स्थायी करने और राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए पहल की मांग की


अररिया, 07 नवम्बर (हि.स.)।

बिहार राज्य शिक्षा सेवक एवं शिक्षा सेवक तालिमी मरकज संघ की जिला इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को सांसद प्रदीप कुमार सिंह से मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसमें 18 साल से सेवा दे रहे कर्मियों को स्थायी करने और राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग की गई।

सौंपे गए मांग पत्र में बताया गया कि शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों की नियुक्ति 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर हुई थी। तब से कर्मी स्कूलों और स्कूलों के बाहर शिक्षा व साक्षरता से जुड़े कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा वे विभागीय और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी निभाते हैं। संघ का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिला है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अलग-अलग कार्यक्रमों में शिक्षा सेवकों का भविष्य बेहतर बनाने और सरकारी सेवक का दर्जा देने की बात कही थी। संघ के मुताबिक, इन आश्वासनों के बावजूद अब तक मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई है।

ज्ञापन में 2018 की नियमावली में संशोधन कर सभी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग की गई है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग या किसी अन्य विभाग में समायोजित करने और सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी रखी गई।

संघ ने विकास मित्रों की तरह एक करोड़ रुपये का ग्रुप बीमा कराने की मांग की। सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को अनुग्रह अनुदान के साथ 36 महीने का अतिरिक्त मानदेय देने और अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके अलावा सरकारी खर्च पर डीएलएड प्रशिक्षण कराने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कर्मियों को पिछले चार महीने से मानदेय नहीं मिला है। इससे शिक्षा सेवकों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने सांसद से मांगों को सरकार तक पहुंचाकर जल्द समाधान कराने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर