स्कूली समस्याओं का खुद निदान करेंगे शिक्षक
सुपौल, 23 मई (हि.स.)। जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पिपरा प्रखंड के बसहा में पांच दिवसीय सेवाकालीन प्रशिक्षण समाप्त हो गया। हालांकि जनगणना व अन्य कार्य में प्रतिनियुक्त रहने के कारण कई शिक्षक सेवाकालीन प्रशिक्षण नहीं कर पाए हैं।
प्रशिक्षण प्रमाणपत्र वितरण के बाद शिक्षकों को संबोधित करते हुए संस्थान के प्राचार्य एखलाख खां ने कहा कि स्कूली समस्याओं के समाधान में शिक्षकों की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्ग संचालन, छात्रों के सीखने की गति सहित अन्य समस्याओं का निपटारा शिक्षक खुद अपने स्तर पर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्रनिर्माता हैं। उनका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए ऐसा कार्य व व्यवहार करें जिससे छात्र आपका अनुकरण करे।
उन्होंने शिक्षकों को हर वक्त बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। नोडल पदाधिकारी डॉ. सुमित कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण से शिक्षकों को नई ऊर्जा मिली है। उन्हें अपने साथी शिक्षकों के साथ अनुभव और विचारों को साझा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए यह प्रशिक्षण बेहतर साबित होगा। प्रशिक्षण प्रभारी मो. आफताब आलम, व्याख्याता सुषमा श्रेष्ठा, मनोरंजन कुमार और मदन कुमार ने विविध गतिविधियों के माध्यम से क्रियात्मक शोध की बारीकी को समझाया।
सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सेवकालीन प्रशिक्षण जरूरी है। नई शिक्षा नीति के तहत सभी शिक्षकों के लिए हर साल पांच दिवसीय प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। गुणात्मक सुधार और शिक्षण प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए शिक्षकों का सेवाकालीन प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इसके माध्यम से शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीक, तकनीकी उपकरण और पाठ्यक्रम में होने वाले बदलाव की जानकारी मिलती है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

