सरस्वती विद्या निकेतन में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी आयोजित, बिहार की गौरवशाली परंपरा पर हुई चर्चा
सुपौल, 24 अक्टूबर (हि.स.)। निर्मली स्थित सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) में शनिवार को शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘बिहार की गौरवशाली परंपरा’ रहा। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधान संजय कुमार, निर्मली के भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। इस दौरान बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान परंपरा से विद्यार्थियों को परिचित कराने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है। इस धरती ने विश्व को ज्ञान, दर्शन, कला और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों में अपनी मातृभूमि, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो सके। संगोष्ठी के दौरान महात्मा बुद्ध, सम्राट अशोक, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, मधुबनी कला और लोक आस्था के महापर्व छठ जैसे बिहार की विशिष्ट पहचान से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से विद्यार्थियों को अवगत कराने से उनमें अपनी जड़ों को समझने और गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी। मौके पर शिक्षक-अभिभावक सहभागिता को भी महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में उपयोगी बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

