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मूलभूत सुविधा को तरसता विद्यालय, 30 वर्षों में नहीं मिला सड़क

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मूलभूत सुविधा को तरसता विद्यालय, 30 वर्षों में नहीं मिला सड़क


भागलपुर, 05 फ़रवरी (हि.स.)। जिले के पीरपैंती प्रखंड के हरिनकोल पंचायत के छोटी दिलौरी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय छोटी दिलौरी आज भी बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं। उल्लेखनीय है कि विद्यालय की स्थापना को लगभग 30 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक स्कूल तक पहुंचने के लिए एक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।

बरसात हो या बाढ़, हर मौसम में छोटे-छोटे बच्चे, शिक्षक और अभिभावक खेतों और कीचड़ भरी पगडंडियों से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। फिसलकर गिरना, कपड़े खराब होना और चोट लगना यहां आम बात है, लेकिन शिक्षा की ललक बच्चों को हर दिन इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरने पर मजबूर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते वर्षों में सरकारें बदलीं, मुखिया बदले, जनप्रतिनिधि बदले—लेकिन छोटी दिलौरी गांव और स्कूल की तस्वीर जस की तस बनी हुई है। आज भी सैकड़ों परिवार सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

विद्यालय में पीने के पानी के लिए सरकारी चापाकल तो उपलब्ध है, लेकिन उससे अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। मजबूरी में बच्चे वही पानी पीते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। विद्यालय की चारदीवारी जर्जर होकर पूरी तरह टूट चुकी है। इसका फायदा उठाकर रात के समय असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में घुस जाते हैं। शौचालयों में तोड़फोड़ की जाती है।

परिसर में गंदगी फैलाई जाती है गुटखा खाकर स्कूल को गंदा किया जाता है। इस हालात में बच्चों को कई बार शौच के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है, जो सुरक्षा और स्वच्छता—दोनों दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। विद्यालय के शिक्षक सुनील कुमार यादव, बरुण पासवान और शिक्षिका श्रेया चौधरी ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय के लिए मजबूत चारदीवारी का निर्माण कराया जाए। स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर न जाना पड़े और पढ़ाई का माहौल सुरक्षित बन सके।

स्थानीय ग्रामीण नीरो देवी, पंकज यादव, धर्मेश यादव, दिलीप यादव, अखिलेश यादव, पप्पू कुमार सहित अन्य लोगों का कहना है एक साल पहले तक स्कूल की हालत बेहद खराब थी, लेकिन जब से शिक्षिका श्रेया चौधरी यहां पदस्थापित हुई हैं, तब से स्कूल में रौनक लौट आई है। बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और पढ़ाई का स्तर भी बेहतर हुआ है। कम संसाधनों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाना उनकी कार्य शैली को दर्शाता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है स्कूल तक तत्काल पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। शुद्ध पेयजल, चारदीवारी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी सम्मानजनक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर