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शहर को कचड़ा मुक्त बनाने को लेकर समाजसेवी का सत्याग्रह

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शहर को कचड़ा मुक्त बनाने को लेकर समाजसेवी का सत्याग्रह


भागलपुर, 10 मई (हि.स.)। भागलपुर स्मार्ट सिटी की पहचान इन दिनों सड़कों पर बिखरे कचरे और गंदगी के अंबारों से होने लगी है। प्रशासन की इसी बेरुखी के खिलाफ अब एक युवा ने गांधीवादी संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता आलोक यादव शहर को कचरा मुक्त बनाने और नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए 21 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। उनकी यह तपस्या अब धीरे-धीरे एक जन-आंदोलन का रूप ले रही है, जिसने नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन तक की नींद उड़ा दी है।

धरना स्थल पर डटे आलोक यादव ने रविवार को बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था केवल कागजों और टेंडरों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि धरातल पर आम जनता बदबू और बीमारियों के बीच जीने को मजबूर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक डंपिंग यार्ड का वैज्ञानिक निस्तारण और हर वार्ड में कचरा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक उनका यह अन्न त्याग जारी रहेगा। जैसे-जैसे अनशन के दिन बढ़ रहे हैं, आलोक की शारीरिक स्थिति तो कमजोर हो रही है, लेकिन उनकी आंखों में अपने शहर को सुंदर बनाने की चमक और भी बढ़ती जा रही है।

इस आंदोलन की गूंज अब गली-मोहल्लों तक पहुंच चुकी है और भारी संख्या में शहरवासी उनके समर्थन में धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो काम वर्षों से नगर निगम के करोड़ों के बजट नहीं कर पाए, उसे आलोक ने अपनी भूख की शक्ति से कर दिखाया है। यानी सोए हुए सिस्टम को झकझोरना। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है, फिर भी आलोक अपनी जिद पर अडिग हैं। अब भागलपुर की जनता की निगाहें प्रशासनिक गलियारे पर टिकी हैं कि क्या सत्ता के शिखर पर बैठे अधिकारी इस 'सत्याग्रही' की आवाज सुनेंगे या शहर फिर से उसी गंदगी के साये में जीने को अभिशप्त रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर