तिलाबे नदी को कचरे का डंपिंग जोन बना रही सफाई एजेंसी, छठ से पहले सफाई पर फिर खर्च होंगे लाखों*
सहरसा, 06 नवंबर (हि.स.)।
जिला के सोनवर्षाराज नगर पंचायत की साफ-सफाई व्यवस्था आउटसोर्सिंग से चल रही है।
पहले संपूर्ण नगर पंचायत के टोला-मोहल्ला की सफाई कर कूड़ा-कचड़ा को तिलाबे नदी में फेंका गया और अब जब लोक पर्व छठ का समय आया तो घाटों के लिए पुनः तिलाबे नदी की सफाई करनी पड़ रही है। मतलब पहले गंदा करो, फिर सफाई करो। जबकि तिलाबे नदी भी नगर पंचायत का ही हिस्सा है।
अगर हरेक दिन तिलाबे नदी के आसपास के हिस्सों की सफाई होते रहती और उसे कूड़ा-कचड़ा का डंपिंग एरिया नहीं बनाया जाता यो आज सफाई करने न तो नौबत आती और न ही अनावश्यक खर्च ही करना पड़ता।
अगर सच पूछा जाय तो तिलाबे नदी सफाई नाम पर सरकारी राशि का घोटाला किया जा रहा है। एक तरफ नदियों की स्वच्छ्ता के लिए गंगा उत्सव 2026 के तहत गंगा आरती कर सरकार लोगों को जागरूक कर रही है तो दूसरी तरफ नगर प्रशासन तिलाबे नदी को कूड़ा-कचड़ा का डंपिंग जॉन बना कर रख दिया है।
नगर क्षेत्र की सफाई का जिम्मा संभाल रही एजेंसी
नगर क्षेत्र की सफाई का जिम्मा संभाल रही एजेंसी ने प्रमुख तिलाबे नदी को कचरे से भरकर गंदे नाले में तब्दील कर दिया है। आरोप है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये सालाना भुगतान लेने वाली एजेंसी शहर से निकलने वाले टनों कचरे को नदी के बहाव क्षेत्र में डंप कर रही है।
विडंबना यह है कि छठ पर्व से पहले इसी कचरे को हटाने के लिए नगर प्रशासन को लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। एक ही कार्य पर दोहरा खर्च वित्तीय अनियमितता की आशंका पैदा करता है। वहीं, नदी और जलस्रोतों में कचरा डालना पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कानूनों के तहत दंडनीय हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि नदी को कचरा मुक्त रखने की जिम्मेदारी किसकी है और इस लापरवाही पर कार्रवाई कब होगी?
इधर, नगर पंचायत सोनवर्षाराज के ईओ नवीन कुमार का कहना है की नगर प्रशासन केवल जेसीबी का खर्च वहन कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सोनी

