विधान परिषद में एमएलसी सच्चिदानंद राय ने पंचायत प्रतिनिधियों को वेतन-पेंशन देने का किया मांग
सारण, 23 जुलाई (हि.स.)। बिहार विधान परिषद में एक बार फिर त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय, पेंशन, मेडिकल और अन्य सुविधाओं का मुद्दा एमएलसी सच्चिदानंद राय ने उठाया।
एमएलसी ने गैर-सरकारी संकल्प लाते हुए सरकार से मांग की कि पंचायत प्रतिनिधियों को भी विधानमंडल और संसद के सदस्यों की तर्ज पर नियमित वेतन, भत्ता, मेडिकल और पेंशन की व्यवस्था दी जाए।
सदन के समक्ष अपनी बात रखते हुए सच्चिदानंद राय ने कहा कि जनता द्वारा चुने गए सांसद और विधायकों को तो सभी तरह की सुविधाएं, पेंशन और भत्ते मिलते हैं, लेकिन दिन-रात जमीन पर काम करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को केवल मामूली मानदेय दिया जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि त्रिस्तरीय पंचायत के प्रतिनिधियों ने क्या गुनाह किया है? उनके यहाँ भी लोग आते हैं, चाय-पानी का खर्च होता है। हम विधायक-एमएलसी तो बिना पेंशन के भी जी लेंगे, लेकिन उनका घर का खर्च बिना पेंशन के नहीं चलता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
दशरथ मांझी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा जब तक वेतन, पेंशन और भत्ता लागू नहीं होगा, तब तक हम इस विषय को सदन में लाते रहेंगे। भविष्य में विचार किए जाने की उम्मीद के साथ सच्चिदानंद राय ने अपना गैर-सरकारी संकल्प वापस ले लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

