प्रो. रूबी मिश्रा को मिला अंतरराष्ट्रीय संस्कृत रत्न सम्मान
दरभंगा, 04 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत एवं प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में योगदान के लिए भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राचार्य एवं रसायन विज्ञान की प्राध्यापिका प्रो. रूबी मिश्रा को बैंकॉक में आयोजित पंचम वैश्विक संस्कृत सम्मेलन-2026 में अंतरराष्ट्रीय संस्कृत रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रो. रूबी मिश्रा की इस उपलब्धि पर दरभंगा के एक निजी होटल में रविवार काे सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग-चादर से सम्मानित किया गया।
प्रो. मिश्रा ने बताया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 28 से 30 सितंबर 2026 तक सिल्पकोर्न विश्वविद्यालय, बैंकॉक में ग्लोबल संस्कृत फोरम, संस्कृत अध्ययन केंद्र एवं थाई-भारत सांस्कृतिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली : संस्कृतियों एवं ज्ञान-परंपराओं के बीच सेतु’ था।
उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैज्ञानिक पक्ष को रेखांकित करने की जरूरत है। संस्कृत ग्रंथ केवल आध्यात्मिक एवं साहित्यिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि इनमें रसायन विज्ञान, धातु विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक रंगों एवं टिकाऊ जीवन-पद्धति से संबंधित समृद्ध ज्ञान भी उपलब्ध है। इस ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में समझने, शोध से जोड़ने एवं नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
प्रो. मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल आधारित अध्ययन से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है। मातृभाषा में शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम एवं बहुविषयक दृष्टिकोण के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़कर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने भारत-थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों, रामायण परंपरा, मंदिर स्थापत्य तथा पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्कृत, भारतीय संस्कृति एवं वैज्ञानिक विरासत के वैश्विक प्रचार-प्रसार के प्रति उनकी दीर्घकालीन प्रतिबद्धता की मान्यता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra

