पर्यावरण संरक्षण में नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका : प्रो. भारती
सहरसा, 05 जून (हि.स.)। पर्यटन स्थल मत्स्यगंधा स्थित कलाग्राम में शूकरवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वैदेही कला संग्रहालय के द्वारा 'पर्यावरण संरक्षण और नदी' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में नदी विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश भारती मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित थे।
डॉ. भारती ने कहा कि नदियाँ पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जल पारिस्थितिकी तंत्र का आधार है। नदियाँ पीने के पानी, सिंचाई और उद्योगों के लिए जल प्रदान करती हैं। ये जैव विविधता को बनाए रखती हैं, क्योंकि इनके किनारे विभिन्न प्रजातियों के पौधे, जीव-जंतु और सूक्ष्मजीव पनपते हैं।
नदियाँ बाढ़ के दौरान उपजाऊ मिट्टी को मैदानों में जमा करती हैं, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़ती है। नदियाँ स्थानीय जलवायु को संतुलित करती हैं। ये नमी प्रदान करती हैं, जो वर्षा चक्र को प्रभावित करती है और तापमान को नियंत्रित करती है। साथ ही अपशिष्ट को बहाकर ले जाती हैं और प्राकृतिक रूप से जल को शुद्ध करती हैं, बशर्ते प्रदूषण का स्तर उनकी वहन क्षमता से अधिक न हो।
नदियाँ विभिन्न जलीय और स्थलीय प्रजातियों का आवास हैं। ये मछलियों, पक्षियों और अन्य जीवों के लिए प्रजनन और जीवन-चक्र का आधार हैं। नदियाँ जल चक्र को बनाए रखती हैं, जो भूमिगत जल को रिचार्ज करने और समुद्रों तक जल पहुँचाने में मदद करती हैं। नदियाँ न केवल पर्यावरण, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को भी समृद्ध करती हैं, जैसे मछली पालन, पर्यटन और जल परिवहन। नदियों का प्रदूषण, अत्यधिक दोहन और बांध निर्माण उनकी पर्यावरणीय भूमिका को खतरे में डालते हैं। नदियों की सुरक्षा के लिए प्रदूषण नियंत्रण, वनीकरण, और टिकाऊ जल प्रबंधन आवश्यक है।
पर्यावरण के लिए जंगल की महत्ता बताते हुए डॉ. भारती ने कहा उत्तर बिहार की नदियों में अप्रत्याशित बाढ़ का मुख्य कारण है, जंगलों की कटाई। अंग्रेजों ने नील की खेती करने के लिए कोसी, महानंदा, कमला, बलान, बागमती तथा गंडक नदी क्षेत्र के जंगलों को कटवा दिया। अंग्रेजों के जानी के जंगल की अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है, जिसके कारण इस क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर बिहार में बेहतशा गर्मी बढ़ने का कारण ग्लोबल से ज्यादा स्थानीय है। समय रहते हमें जंगल और नदी के संरक्षण पर ध्यान देना होगा।
संगोष्ठी का संचालन डॉ. महेंद्र कुमार ने किया। डॉ. भाग्यश्री राउत, नीतीश प्रियदर्शी, आरती कुमारी, सोमसी यादव, दीपक कुमार, अविनाश कुमार के साथ देश के विभिन्न भागों से शोधार्थियों और विद्वानों ने आनलाइन भाग लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार

