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गोदाम में आंगनबाड़ी केंद्रों की चावल की कालाबाजारी, अवैध वसूली का आरोप

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गोदाम में आंगनबाड़ी केंद्रों की चावल की कालाबाजारी, अवैध वसूली का आरोप


नवादा, 18 सितंबर (हि.स.)। नवादा जिले के सदर प्रखंड परिसर स्थित खाद्य निगम के गोदाम से आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराए जाने वाले चावल में कथित अनियमितता और अवैध वसूली का मामला सामने आया है।

आंगनबाड़ी सेविकाओं तथा समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि गोदाम से चावल उठाव न कर कालाबाजारी को कुछ पैसे लेकर छोड़ देने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। कुछ पैसे लेकर कालाबाजारी के लिए चावल नहीं छोड़ने पर निर्धारित मात्रा से कम चावल दिए जाने का आरोप है। मामले को लेकर सेविकाओं ने वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

आंगनबाड़ी सेविकाओं का आरोप है कि केंद्रों के लिए निर्धारित 50 किलोग्राम के बोरे में करीब 40 किलोग्राम ही चावल दिया जा रहा है। सेविकाओं का कहना है कि यदि गोदाम से चावल उठाव के दौरान बिचौलियों की मांग के अनुसार कालाबाजारी के लिए चावल नहीं छोड़ी जाती है तो कथित तौर पर बोरे में चावल की मात्रा कम कर दी जाती है। इसके कारण प्रत्येक बोरे में करीब 10 किलोग्राम चावल कम मिलने का दावा किया गया है।

सेविकाओं के अनुसार, बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों को चावल उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में प्रत्येक बोरे में निर्धारित मात्रा से कम चावल दिए जाने की स्थिति में बड़ी मात्रा में सरकारी खाद्यान्न की बंदरबाट हो रही है ।

उन्होंने आशंका जताई है कि इस तरह की अनियमितता लंबे समय से जारी रहने पर लाखों रुपये मूल्य के चावल के घपले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

शिकायत में सेविकाओं ने खाद्य निगम के गोदाम में उपलब्ध स्टॉक, गोदाम से निर्गत चावल और आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराई गई वास्तविक मात्रा का मिलान कराने की मांग की है। साथ ही चावल के प्रत्येक बोरे का वजन कराकर वितरण सुनिश्चित करने तथा उठाव के दौरान बिचौलियों की भूमिका की जांच करने का आग्रह किया गया है।

सेविकाओं का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए पोषाहार की व्यवस्था की जाती है। यदि केंद्रों को निर्धारित मात्रा में चावल उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो इसका सीधा असर बच्चों को मिलने वाले पोषाहार पर पड़ सकता है। इसलिए खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।

समाजसेवी दिनेश अकेला ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोदाम परिसर में ही बिचौलियों द्वारा कथित तौर पर आंगनबाड़ी सेविकाओं पर दबाव बनाकर चावल की कालाबाजारी के लिए हिस्सा छोड़ने का दबाव बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी और अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। यदि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सुमन