मध्यप्रदेश के कटनी से रेस्क्यू किए गए 144 बच्चों को लाया गया अररिया
अररिया 25 अप्रैल(हि.स.)।
मध्यप्रदेश के कटनी में बाल तस्करी के शक में रेस्क्यू किए गए 144 बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति द्वारा शनिवार को अररिया लाया गया।ये सभी बच्चे महाराष्ट्र जा रहे थे और सभी बच्चे अररिया जिला के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से संबंध रखते हैं।
मध्यप्रदेश के कटनी में चाइल्डलाइन के द्वारा मानव तस्करी के शक में सभी बच्चों को दो सप्ताह पहले डिटेन कर चाइल्डलाइन में रखा गया था।मध्यप्रदेश के कटनी में 167 बच्चों को रेस्क्यू किया गया था,जिनमें से 144 बच्चे अररिया जिला के थे,बाकी अन्य बच्चे सीमांचल के विभिन्न जिलों से थे। अररिया पहुंचने के बाद जिला बाल कल्याण समिति के द्वारा सभी बच्चों का काउंसिलिंग किया गया।काउंसिलिंग के बाद सभी बच्चों को उनके अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया।
मौके पर जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार रिंकू ने बताया कि ये बच्चे महाराष्ट्र के लातूर मदरसा में दीनी तालीम के लिए जा रहे थे।मध्यप्रदेश के कटनी में चाइल्डलाइन के द्वारा मानव तस्करी के शक में इन बच्चों को रोका गया था।जिसके बाद कटनी चाइल्डलाइन के द्वारा लातूर के मदरसा को लेकर जांच और जानकारी ली गई तो मदरसा प्रबंधन समिति ने बच्चों के गायब होने या अन्य मामलों को लेकर अपनी जवाबदेही से इंकार कर दिया।जिसके बाद कटनी चाइल्डलाइन द्वारा अररिया जिला प्रशासन से संपर्क साधा।जिसके बाद जिला बाल कल्याण समिति के द्वारा रेस्क्यू किये गए बच्चों को अररिया वापस लाया गया।अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि अररिया के बच्चों को उड़ीसा में भी रेस्क्यू किया गया है,जिसका अभी आना बाकी है।
उड़ीसा में जिस मदरसे में दीनी तालीम के लिए बच्चों को भेजा गया था,उस मदरसे की मान्यता भी समाप्त हो चुकी है।उन्होंने बताया कि मुफ्त दीनी तालीम को लेकर सीमांचल से देश के अलग अलग हिस्सों में स्थित मदरसा में बच्चों को भेजा जाता है।गरीबी और मुफलिसी में अभिभावक अपने बच्चों को भेज देते हैं,लेकिन वहां उनके साथ क्या होगा है,कोई देखने वाला नहीं होता।उन्होंने बताया कि कई स्थानों से बच्चों से बाल श्रम कराने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
वहीं मौके पर मौजूद जिला पार्षद परवेज मुशर्रफ ने पंद्रह दिनों तक बच्चों के डिटेन पर सवाल खड़ा किया और बताया कि इससे बच्चों में मन मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है।सीमांचल से बच्चों के दीनी तालीम को लेकर सदियों से बाहर मदरसा पढ़ने के लिए जाने की बात करते हुए शक की नजर से देखने पर सवाल खड़ा किया।उन्होंने कहा कि कुरान की तालीम के लिए तीन चार साल तक बच्चों के मदरसे में पढ़ाई करना विवशता होती है और स्थानीय स्तर पर बच्चे मदरसा में नहीं पढ़ पाते है और गृह प्रेम के कारण वे घर भाग जाते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

