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किशनगंज में निजी स्कूलों की जबरन खरीदारी पर प्रशासन का कड़ा आदेश

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किशनगंज, 06 अप्रैल (हि.स.)। जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों को महंगी दरों पर यूनिफॉर्म, पुस्तकें, बैग, जूते और स्टेशनरी सामग्री बेचने तथा निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया है।

समाचार पत्रों और अभिभावकों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने इस संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निजी विद्यालयों की ऐसी प्रथाओं से अभिभावकों, विशेषकर गरीब परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जिससे शिक्षा महंगी होती जा रही है।

इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 की धारा-4 (6) का हवाला देते हुए निर्देश जारी किया है कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान, स्थान या संस्था से यूनिफॉर्म, पुस्तकें या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

आदेश के अनुसार, कोई भी विद्यालय संचालक या प्राचार्य विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते, टाई, पाठ्य-पुस्तकें, कॉपियां या अन्य स्टेशनरी केवल एक ही दुकान या विक्रेता से खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर अधिनियम की धारा-7 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक निजी विद्यालय को कम से कम पांच दुकानों की सूची अपने सूचना पट्ट और विद्यालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी, ताकि अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीद सकें। साथ ही सभी निजी विद्यालयों को 15 अप्रैल 2026 से पहले प्रत्येक कक्षा की अनिवार्य पुस्तकों की सूची और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

इसके अलावा यह जानकारी विद्यालय परिसर के सार्वजनिक स्थान पर चस्पा करना भी अनिवार्य होगा। यूनिफॉर्म का निर्धारण इस प्रकार किया जाएगा कि उसमें कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव न किया जाए, जिससे अभिभावकों पर हर वर्ष नया खर्च न पड़े। आदेश में चेतावनी दी गई है कि निर्देशों का उल्लंघन करने की स्थिति में विद्यालय के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक तथा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सभी सदस्य उत्तरदायी होंगे।

जिला शिक्षा विभाग के सभी पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो विद्यालयों का निरीक्षण कर अनियमितताओं की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, मितव्ययी और सर्वसुलभ बनेगी। वहीं अभिभावक संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि लंबे समय से निजी विद्यालयों की जबरन खरीदारी और कमीशनखोरी से परेशान परिवारों को अब राहत मिलेगी। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि कोई विद्यालय इन निर्देशों की अवहेलना करता है तो वे जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह