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पुनौरा धाम में रामभद्राचार्य जी ने श्री राम कथा के तीसरे दिन सीता और राम के सोलह गुणों की व्याख्या की

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पुनौरा धाम में रामभद्राचार्य जी ने श्री राम कथा के तीसरे दिन सीता और राम के सोलह गुणों की व्याख्या की


सीतामढ़ी, 20 अप्रैल (हि.स.)। जगतगुरू तुलसीपीठाधीश्वर श्री रामभद्राचार्य जी ने सीता जन्मभूमि पुनौरा धाम के सीता प्रेक्षागृह में श्री राम कथा के तीसरे दिन सीता और राम के सोलह गुणों की व्याख्या की।

कथा के आरंभ में वैदिक विधि विधान से गुरु पद पूजन मुख्य यजमान जानकी नंदन पाण्डेय जी ने किया। व्यास पीठ पूजन और आरती के पश्चात कथा आरंभ हुई।

गुरुदेव ने कहा सीता राम एक ही है। कोई भेद ही नहीं है।दोनों परम ब्रह्म एक है ।एक अवध में अवधेश कुमार है वही मिथिला में मिथिलेश कुमारी है।अवध में किशोरी जी एवं मिथिला में किशोरी जी है।

गुरुदेव ने कहा राम और सीता के सोलह विशेषण है।श्री हनुमान जी के माध्यम से सोलह कार्य सम्पन्न राम जी करवाए है।

गुरुदेव ने कहा सीता जन्मभूमि पर उनकी चौदह सौ बीसवीं कथा आयोजन है।सीता बहुरानी को आजीवन कथा श्रवण कराने का संकल्प दोहराते हुए कहा इसी सीता कुंड से भगवती सीता प्रकट हुई।पुनौराधाम सीता प्राकट्य भूमि है।

उन्होंने कहा कि जिनकी कृपा से काम क्रोध मद अहंकार शांत हो जाए वही शांतम रूप राम है।जिनका प्रमाणीकरण नहीं हो वही राम है।जिनमें कोई पाप नहीं हो,जो देवताओं को शांति प्रदान करे ,जिसकी वंदना ब्रह्मा विष्णु महेश शेष करे वही राम है।जिनको वेद वेदांत में दर्शन किया जा सके वही ब्रह्म राम है।जो सबके अंतर्यामी है वही राम है।जो जगत के ईश्वर है जो देवताओं के गुरु है जो माया मनुष्य है जो जीवों पर कृपा करे जो स्वयं हरि हो जो करुणा के सागर हो जो रघुकुल में श्रेष्ठ हो जो राजाओं में मुकुट मणि हो वही राम है।उसी प्रकार हनुमान जी ने सोलह कार्य राम जी की कृपा से किए।

उन्होंने कहा कि सीता जी में भी सोलह श्रेष्ठ गुण है।सीता सर्वश्रेष्ठ है।सीता परम ब्रह्म है राम जी और सीता जी एक ही है। दोनो में कोई भेद नहीं है।सीता और राम दोनों का स्मरण करने मात्र से भवसागर पार हो जाता है।जहां जहां राम है वहां वहां सीता है।सीताराम एक ही है।

आज की कथा में संयोजक राम शंकर शास्त्री रघुनाथ तिवारी राम छबीला चौधरी राधे श्याम शर्मा दिलीप शाही शंकर सुशील सुंदरका शैलेन्द्र सिंह आग्नेय कुमार बाल्मीकि कुमार मनोज सिंह श्री निवास मिश्रा त्रिपुरारि सिंह धनुषधारी सिंह समेत सैकड़ों भक्तों ने कथा श्रवण की।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी