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बिहार में शराबबंदी सामाजिक न्याय और जनहित का मजबूत संकल्प: प्रेम रंजन पटेल

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पटना, 07 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा शराबबंदी कानून को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यहीन, भ्रामक और राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताया है।

उन्होंने ने कहा बिहार में लागू शराबबंदी कोई साधारण प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि यह समाज सुधार, महिला सशक्तिकरण और जनस्वास्थ्य के लिए लिया गया ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह कानून गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से लागू किया गया। आज बिहार के लाखों परिवार इस निर्णय के कारण घरेलू हिंसा में कमी, आर्थिक बचत और सामाजिक स्थिरता का अनुभव कर रहे हैं। जहां तक कानून के क्रियान्वयन की बात है, किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन में चुनौतियाँ स्वाभाविक होती हैं। अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई यह बताती है कि सरकार कानून को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। लाखों लीटर शराब की जब्ती और हजारों गिरफ्तारियां यह प्रमाणित करती हैं कि प्रशासन सक्रिय है, न कि निष्क्रिय जैसा कि तेजस्वी आरोप लगा रहे। कुछ घटनाओं या आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना पूरे कानून को विफल बताने का आधार नहीं बन सकता। बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार कानून को लागू करने में गंभीर है और शख्त भी तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं कर रही।

नेता प्रतिपक्ष द्वारा “समानांतर अर्थव्यवस्था” जैसे आरोप केवल जनभावनाओं को भड़काने और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास है। यदि नेता विपक्ष के पास कोई ठोस प्रमाण है, तो उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए, न कि केवल मीडिया में बयानबाजी करनी चाहिए।

पटेल ने कहा की शराबबंदी के कारण बिहार में सामाजिक ताने-बाने को मजबूती मिली है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, परिवारों में बचत की प्रवृत्ति आई है और अपराध के कई प्रकारों में गिरावट दर्ज की गई है। अपराधिक मामलों में 22% की कमी आई।

पटेल ने कहा है की सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि नशा मुक्ति के लिए जागरूकता अभियान, पुनर्वास केंद्र और वैकल्पिक रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि समाज को पूरी तरह नशामुक्त बनाया जा सके। शराबबंदी बिहार के आत्मसम्मान, सामाजिक न्याय और स्वस्थ समाज की दिशा में एक सशक्त कदम है। इसे विफल बताना न केवल सच्चाई से परे है, बल्कि उन लाखों परिवारों के संघर्ष और सुधार का अपमान भी है, जिन्होंने इस कानून से लाभ उठाया है। “शराबबंदी सिर्फ कानून नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का संकल्प है और यह संकल्प अडिग है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त