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त्रिवेणीगंज का सरकारी तालाब बदहाली का शिकार, जल जीवन मिशन पर उठे सवाल

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त्रिवेणीगंज का सरकारी तालाब बदहाली का शिकार, जल जीवन मिशन पर उठे सवाल


सुपौल, 25 अप्रैल (हि.स.)। जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड परिसर स्थित सरकारी तालाब आज अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। जिस तालाब को जल संरक्षण और स्वच्छता का प्रतीक होना चाहिए, वह आज गंदगी और उपेक्षा का शिकार बन गया है।

तालाब की नियमित सफाई और देखरेख के अभाव में वर्षों से इसमें जलकुंभी का कब्जा हो गया है। पूरे तालाब में जलकुंभी फैली हुई है, जिससे न केवल इसकी सुंदरता नष्ट हो गई है बल्कि जल संचयन की क्षमता भी प्रभावित हुई है। तालाब के उत्तरी छोर पर लोग कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं, जिससे यह स्थान गंदगी का ढेर बन चुका है। इतना ही नहीं, यह क्षेत्र धीरे-धीरे सार्वजनिक शौच और यूरिनल के रूप में भी इस्तेमाल होने लगा है।

तालाब की संरचना भी कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। लंबे समय से इसमें पानी का अभाव बना हुआ है, जिसके कारण स्थानीय लोगों को जल की सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। करीब पांच वर्ष पहले इस तालाब की लाखों रुपये की लागत से सफाई और मरम्मत कराई गई थी, लेकिन उसके बाद रखरखाव नहीं होने के कारण आज इसकी स्थिति फिर से दयनीय हो गई है।

विडंबना यह है कि यह तालाब मनरेगा और प्रखंड मुख्यालय के समीप स्थित होने के बावजूद अधिकारियों की नजर से ओझल है। यहां तक कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी इस क्षेत्र से गुजरते हैं, लेकिन इस बदहाली की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सरकार द्वारा जल जीवन हरियाली और जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत पुराने तालाबों की सफाई और नए तालाबों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस तालाब की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इस तालाब में छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन होते थे। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी यहां वजू कर नमाज अदा करते थे, लेकिन वर्तमान में गंदगी और पानी की कमी के कारण यह सब पूरी तरह बंद हो चुका है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तालाब की जल्द से जल्द सफाई, मरम्मत और संरक्षण किया जाए, ताकि यह पुनः अपने मूल स्वरूप में लौट सके और आम जनता को इसका लाभ मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र